भारत का भूगोल MCQs
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SOI का लगातार सकारात्मक रहना सामान्यतः किस प्रकार की ENSO दशा से जुड़ सकता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
सकारात्मक SOI सामान्यतः ताहिती और डार्विन के बीच ऐसा वायुदाब अंतर दर्शाता है जो ला नीना जैसी परिस्थितियों से जुड़ सकता है। फिर भी SOI का अर्थ समझते समय अन्य समुद्री और वायुमंडलीय संकेतकों को भी देखना चाहिए; एक सूचक अकेले हर क्षेत्र की वर्षा का निश्चित पूर्वानुमान नहीं देता।
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दक्षिणी दोलन को ‘सी-सॉ’ पैटर्न कहने का आशय क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
‘सी-सॉ’ या झूला-जैसा पैटर्न बताता है कि प्रशांत और हिंद महासागर से जुड़े कुछ क्षेत्रों में वायुदाब अक्सर विपरीत दिशा में बदलता है। इन बदलावों का संबंध उष्णकटिबंधीय परिसंचरण से है और वे ENSO तथा मानसून के बीच संबंध समझने में उपयोगी हैं।
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समुद्र-सतह तापमान (SST) मानसून अध्ययन में क्यों महत्वपूर्ण है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
समुद्र-सतह तापमान वाष्पीकरण, हवा में नमी और संवहन को प्रभावित करता है। प्रशांत या हिंद महासागर में तापमान का असामान्य वितरण दाब-पवन प्रणालियों में बदलाव ला सकता है। इसी कारण SST के आँकड़े मानसून की निगरानी और मौसमी पूर्वानुमान में उपयोग किए जाते हैं।
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मानसून के आधुनिक सिद्धांत में उपग्रहों और समुद्री जहाजों से मिले आँकड़ों का प्रमुख लाभ क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
उपग्रह बादल, समुद्री सतह तापमान और वर्षा के विस्तृत क्षेत्रीय पैटर्न दिखाते हैं, जबकि समुद्री जहाज प्रत्यक्ष मौसम अवलोकन उपलब्ध करा सकते हैं। इन आँकड़ों से महासागर-वायुमंडल की परस्पर क्रिया समझने और मानसून पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
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निम्न में से कौन-सा समूह मानसून की आधुनिक व्याख्या में शामिल कारकों का सही उदाहरण है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
आधुनिक व्याख्या मानसून को कई जुड़े कारकों की प्रणाली मानती है। ENSO और IOD महासागरीय तापमान तथा परिसंचरण के संकेतक हैं; जेट धाराएँ ऊपरी वायु प्रवाह को प्रभावित करती हैं और तिब्बत पठार का ग्रीष्मकालीन ताप भी वायुमंडलीय संरचना से जुड़ा है।
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किस कथन से मानसून के पूर्वानुमान की सीमा सबसे सही ढंग से स्पष्ट होती है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
एल नीनो, SOI या IOD जैसे संकेतक मानसून के लिए उपयोगी जानकारी देते हैं, पर कोई एक संकेतक पूरे भारत की वर्षा का निश्चित परिणाम नहीं बताता। क्षेत्रीय स्थलाकृति, मानसून गर्त, समुद्री दशाएँ और मौसम प्रणालियाँ भी वर्षा के समय तथा वितरण को प्रभावित करती हैं।
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Nieuwolt के अनुसार मानसून पवन प्रणाली की पहचान में किस विशेषता पर जोर दिया गया?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
Nieuwolt ने मानसून शब्द के उपयोग के लिए पवन दिशा के मौसमी उलटाव को महत्वपूर्ण माना। साहित्य में उनकी परिभाषा में दिशा परिवर्तन की एक न्यूनतम सीमा का भी उल्लेख मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि हर मौसमी हवा को मानसून नहीं कहा जाता; स्पष्ट मौसमी परिवर्तन इसकी प्रमुख पहचान है।
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भारतीय मानसून पर ENSO और IOD के संयुक्त प्रभाव का अध्ययन क्यों किया जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
ENSO प्रशांत महासागर से जुड़ा है, जबकि IOD हिंद महासागर के पूर्व-पश्चिम तापीय अंतर से संबंधित है। दोनों एक ही वर्ष में अलग-अलग चरणों में हो सकते हैं और उनका संयुक्त प्रभाव मानसून के परिसंचरण तथा वर्षा पर असर डाल सकता है। इसलिए मौसमी पूर्वानुमान में दोनों को साथ देखा जाता है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में मुख्यतः किन दो शाखाओं में विभाजित होता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
भारत की स्थलाकृति और दोनों ओर स्थित समुद्री क्षेत्रों के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की दो प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं—अरब सागर शाखा तथा बंगाल की खाड़ी शाखा। दोनों शाखाएँ देश के अलग-अलग भागों में वर्षा कराती हैं और आगे चलकर उत्तरी मैदानों के आसपास मिल सकती हैं।
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अरब सागर शाखा सामान्यतः सबसे पहले भारत के किस तट पर मानसूनी वर्षा लाती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य आगमन केरल तट पर जून के आरंभ में माना जाता है। अरब सागर से आने वाली नम पवनें पश्चिमी तट पर पहुँचती हैं और पश्चिमी घाट से टकराकर भारी वर्षा कराती हैं। आगमन की वास्तविक तारीख हर वर्ष बदल सकती है।
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अरब सागर शाखा के कारण पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
नम मानसूनी वायु पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती है। ऊँचाई बढ़ने पर वायु ठंडी होती है, जलवाष्प संघनित होता है और ओरोग्राफिक वर्षा होती है। इसलिए पश्चिमी ढाल और तटीय पट्टी में वर्षा अधिक होती है।
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पश्चिमी घाट के पूर्व में दक्कन के कुछ भागों में अपेक्षाकृत कम वर्षा क्यों होती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पश्चिमी घाट पार करने के बाद वायु का बड़ा भाग नमी खो चुका होता है और नीचे उतरते समय गर्म होता है। इससे सापेक्ष आर्द्रता घटती है तथा पूर्वी ओर वर्षा कम हो सकती है। ऐसे क्षेत्र को वर्षाछाया क्षेत्र कहते हैं।
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अरब सागर शाखा की वह धारा जो मुंबई के उत्तर में तट से टकराकर मध्य भारत की ओर बढ़ती है, मुख्यतः किन घाटियों का अनुसरण करती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा का एक भाग मुंबई के उत्तर में तट से टकराकर नर्मदा और तापी की घाटियों के सहारे मध्य भारत की ओर बढ़ता है। यह मध्य भारत में वर्षा में योगदान देता है और आगे गंगा के मैदान की ओर पहुँच सकता है।
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अरब सागर शाखा की तीसरी प्रमुख धारा किन क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा का एक भाग सौराष्ट्र और कच्छ की ओर बढ़ता है तथा पश्चिमी राजस्थान और अरावली के आसपास आगे जाता है। इस मार्ग में वर्षा सामान्यतः कम होती है, क्योंकि अरावली की दिशा मानसूनी पवनों के लिए प्रभावी अवरोध नहीं बनती।
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अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी राजस्थान में व्यापक वर्षा कराने में सीमित प्रभाव का एक प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
अरावली पर्वतमाला की सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है, जो अरब सागर से आने वाली पवनों के प्रवाह के लगभग समानांतर पड़ती है। इसलिए पवनों को व्यापक रूप से ऊपर उठाने वाला अवरोध कम मिलता है और पश्चिमी राजस्थान में वर्षा कम रहती है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मुड़ने से पहले किस पर्वतीय क्षेत्र से प्रभावित होती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा का एक बड़ा भाग म्यांमार के तटीय अराकान पर्वतों से प्रभावित होकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मुड़ता है। इसके कारण यह पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में दक्षिण या दक्षिण-पूर्व से प्रवेश करती दिखाई दे सकती है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वोत्तर भारत में विशेष रूप से अधिक वर्षा क्यों कराती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करने वाली पवनें पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों से टकराती हैं। खासी और गारो पहाड़ियों जैसे स्थलरूप वायु को ऊपर उठाते हैं, जिससे भारी ओरोग्राफिक वर्षा होती है। मेघालय के कुछ स्थानों पर इसी कारण अत्यधिक वर्षा दर्ज होती है।
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मौसिनराम और चेरापूंजी में अत्यधिक वर्षा का भौगोलिक कारण मुख्यतः क्या है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मौसिनराम और चेरापूंजी मेघालय की खासी पहाड़ियों के निकट स्थित हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली अत्यधिक नम पवनें पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं, जिससे बहुत अधिक वर्षा होती है। स्थानीय स्थलाकृति और पवनों की दिशा इस वर्षा को बढ़ाती है।
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हिमालय के दक्षिणी ढाल और तराई क्षेत्र में अधिक वर्षा होने का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
हिमालय मानसूनी पवनों को उत्तर की ओर स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोकता है और उन्हें ऊपर उठने पर मजबूर करता है। इससे दक्षिणी ढाल तथा हिमालय की तलहटी में वर्षा बढ़ सकती है। पर्वतीय अवरोध मानसून के वितरण का महत्वपूर्ण नियंत्रक है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा हिमालय की तलहटी तक पहुँचने के बाद सामान्यतः किस दिशा में मुड़ती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
हिमालय बंगाल की खाड़ी शाखा के उत्तर की ओर विस्तार को रोकता है। परिणामस्वरूप पवनें हिमालय की तलहटी के साथ पश्चिम की ओर मुड़कर गंगा के मैदानों में आगे बढ़ती हैं। इसी प्रक्रिया से पूर्वी और उत्तरी भारत के विस्तृत भागों में वर्षा होती है।