भारत का भूगोल MCQs
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गंगा के मैदान में सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा घटने का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी भारत में प्रवेश करने के बाद गंगा के मैदान के साथ पश्चिम की ओर बढ़ती है। मार्ग में वर्षा के रूप में नमी निकलती जाती है और समुद्र से दूरी भी बढ़ती है, इसलिए सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा कम होती है। स्थानीय अपवाद संभव हैं।
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पंजाब और हरियाणा में मानसूनी वर्षा के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पंजाब और हरियाणा में बंगाल की खाड़ी शाखा पश्चिम की ओर बढ़ती है और अरब सागर शाखा का पश्चिमोत्तर प्रवाह भी प्रभाव डाल सकता है। दोनों धाराओं के मिलने या परस्पर प्रभाव से वर्षा होती है, हालांकि मात्रा और समय में क्षेत्रीय अंतर रहता है।
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कौन-सी शाखा पश्चिमी तट पर भारी वर्षा और दक्कन के पठार के कुछ भागों में वर्षाछाया की स्थिति से विशेष रूप से जुड़ी है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा कराती है। घाट पार करने के बाद वायु की नमी घटने से दक्कन के पठार के कुछ भाग अपेक्षाकृत शुष्क रहते हैं। इसीलिए पश्चिमी तट और आंतरिक पठारी भागों में वर्षा का स्पष्ट अंतर मिलता है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती है और पश्चिमी ढाल पर भारी ओरोग्राफिक वर्षा कराती है। मौसिनराम की अत्यधिक वर्षा मुख्यतः बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पवनों और खासी पहाड़ियों की स्थलाकृति से जुड़ी है। थार मरुस्थल में वर्षा कम होती है।
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कथन 1: अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा कराती है। कथन 2: पश्चिमी घाट पार करने के बाद वायु में नमी सामान्यतः बढ़ जाती है। सही विकल्प चुनिए।
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पहला कथन सही है क्योंकि नम वायु पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती है और वर्षा करती है। दूसरा कथन गलत है: वर्षा के दौरान वायु नमी खो देती है, और घाट के पूर्वी ओर उतरते समय गर्म होकर अधिक शुष्क हो सकती है।
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निम्न में से कौन-सा क्षेत्र बंगाल की खाड़ी शाखा से मिलने वाली प्रचुर मानसूनी नमी के लिए प्रसिद्ध है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वोत्तर भारत तक नमी पहुँचाती है। असम की ब्रह्मपुत्र घाटी और मेघालय की पहाड़ियों में वर्षा उल्लेखनीय होती है। इसके विपरीत लद्दाख, थार और कच्छ के कई भाग शुष्क जलवायु के लिए जाने जाते हैं।
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अरब सागर शाखा के नर्मदा-तापी मार्ग का भारत की वर्षा में क्या महत्व है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
नर्मदा और तापी घाटियाँ अरब सागर तट से मध्य भारत की ओर अपेक्षाकृत अनुकूल मार्ग प्रदान करती हैं। इस धारा से मध्य भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा होती है और आगे यह गंगा के मैदानों में अन्य मानसूनी प्रवाहों से मिल सकती है।
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किस कारण से बंगाल की खाड़ी शाखा का एक भाग बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में दक्षिण-पूर्वी दिशा से प्रवेश कर सकता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
म्यांमार के तटीय अराकान पर्वत बंगाल की खाड़ी से आने वाली पवनों को विक्षेपित करते हैं। इस कारण पवनों का एक बड़ा भाग भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मुड़ता है और पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश में दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा से पहुँच सकता है।
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किस कथन में अरब सागर शाखा की तीन धाराओं का सही वर्णन है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा को मुख्यतः तीन धाराओं में समझाया जाता है: एक पश्चिमी घाट से टकराती है, दूसरी मुंबई के उत्तर से नर्मदा-तापी घाटियों के सहारे मध्य भारत में जाती है और तीसरी सौराष्ट्र-कच्छ तथा पश्चिमी राजस्थान की ओर बढ़ती है।
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पवनाभिमुख ढाल (windward slope) का अर्थ क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
पवनाभिमुख ढाल वह ओर होती है जिसका सामना प्रचलित नम पवनों से होता है। पवनें इस ढाल पर ऊपर उठती हैं, ठंडी होती हैं और वर्षा कराती हैं। इसके विपरीत ओर को पवन-विमुख ढाल कहते हैं, जहाँ वर्षाछाया की स्थिति बन सकती है।
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वर्षाछाया क्षेत्र बनने की प्रक्रिया में कौन-सी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पर्वत के पवनाभिमुख ढाल पर वर्षा के बाद वायु दूसरी ओर उतरती है। नीचे उतरते समय उसका दबाव बढ़ता है और वह गर्म होती है, जिससे सापेक्ष आर्द्रता कम हो जाती है। फलस्वरूप पवन-विमुख क्षेत्र में वर्षा अपेक्षाकृत कम होती है।
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भारत के पश्चिमी तट पर मानसूनी वर्षा के वितरण को समझने में कौन-सा कारक सबसे प्रत्यक्ष है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
पश्चिमी घाट अरब सागर से आने वाली नम पवनों के रास्ते में खड़े हैं। उनकी स्थिति, ऊँचाई और ढाल के कारण वायु ऊपर उठती है और तटीय क्षेत्र में भारी वर्षा होती है। स्थलाकृति के कारण पश्चिमी तट और आंतरिक दक्कन में वर्षा का अंतर स्पष्ट है।
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किस क्षेत्र में अरब सागर शाखा की तुलना में बंगाल की खाड़ी शाखा का प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
ब्रह्मपुत्र घाटी में पूर्वोत्तर से आने वाली बंगाल की खाड़ी शाखा का प्रभाव प्रमुख है। यह शाखा बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करके पूर्वोत्तर भारत पहुँचती है और स्थानीय स्थलाकृति के साथ मिलकर व्यापक वर्षा कराती है।
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कौन-सा कथन सही है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी शाखाएँ अलग-अलग मार्गों से भारत में वर्षा कराती हैं, लेकिन उत्तर भारत के मैदानों में इनके प्रवाह का प्रभाव मिल सकता है। शाखाओं की स्थिति और मानसूनी निम्नदाब प्रणालियों के अनुसार वर्षा का वितरण बदलता रहता है।
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भारत में मानसून की दो शाखाओं का विभाजन मुख्यतः किस व्यापक भौगोलिक स्थिति से संबंधित है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारतीय क्षेत्र के पास पहुँचकर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से संबंधित दो प्रमुख प्रवाहों के रूप में आगे बढ़ता है। समुद्रों की स्थिति, प्रायद्वीपीय भू-आकृति और पर्वतीय अवरोध इनके मार्ग तथा वर्षा के स्वरूप को प्रभावित करते हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान पश्चिमी घाट के वर्षाछाया प्रभाव का उदाहरण समझने के लिए उपयुक्त है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पश्चिमी घाट के पूर्व में दक्कन के कुछ आंतरिक भाग पवन-विमुख स्थिति में हैं। पश्चिमी ढाल पर नमी बरस जाने और वायु के नीचे उतरकर गर्म होने से इन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है। यह वर्षाछाया प्रभाव का प्रमुख उदाहरण है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा गंगा के मैदान में पश्चिम की ओर बढ़ते हुए किस प्राकृतिक अवरोध के कारण उत्तर की ओर आसानी से आगे नहीं बढ़ पाती?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
हिमालय एक विशाल पर्वतीय अवरोध है। बंगाल की खाड़ी शाखा के उत्तर की ओर प्रवाह को रोककर यह उसे हिमालय की तलहटी के साथ पश्चिम की ओर मोड़ता है। इससे गंगा के मैदान में मानसूनी वर्षा का प्रसार होता है।
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किस विकल्प में क्षेत्र और मानसूनी शाखा का संबंध गलत दिया गया है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
मौसिनराम में अत्यधिक वर्षा का प्रमुख संबंध बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पवनों और खासी पहाड़ियों की स्थलाकृति से है, न कि केवल अरब सागर शाखा से। अन्य युग्म अपने-अपने मानसूनी मार्गों और प्रभावों के अनुरूप हैं।
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यदि पश्चिमी घाट का अवरोध न होता, तो अरब सागर से आने वाली नम पवनों के वर्षा-वितरण पर क्या प्रभाव पड़ सकता था?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पश्चिमी घाट नम अरब सागरीय पवनों को ऊपर उठाकर भारी वर्षा कराने में महत्वपूर्ण है। इस पर्वतीय अवरोध के बिना वायु का आरोहण और वर्षा का स्थानीय संकेंद्रण अलग हो सकता था। इसका अर्थ यह नहीं कि मानसून पूरी तरह समाप्त हो जाता।
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किस शाखा का मार्ग पूर्वोत्तर भारत से गंगा के मैदानों की ओर मुड़ने के लिए जाना जाता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा पहले पूर्वोत्तर भारत में वर्षा कराती है। हिमालय की तलहटी पर पहुँचने के बाद इसका प्रवाह पश्चिम की ओर मुड़कर गंगा के मैदानों में फैलता है। यह मार्ग भारत में मानसूनी वर्षा के पूर्व-पश्चिम वितरण को प्रभावित करता है।