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भारत का भूवैज्ञानिक इतिहास

  1. प्रायद्वीपीय भारत को भूवैज्ञानिक दृष्टि से प्राचीन क्यों माना जाता है?

    Options:
    1. यह नवीन जलोढ़ निक्षेपों से बना है
    2. यह केवल हिमालयी चट्टानों से बना है
    3. यह आधुनिक प्रवाल भित्तियों से बना है
    4. यहाँ प्राचीन आग्नेय और कायांतरित चट्टानें व्यापक हैं

    Correct Option: D

    Explanation:

    प्रायद्वीपीय भारत भारतीय भू-पर्पटी के पुराने और अपेक्षाकृत स्थिर भागों में शामिल है। यहाँ आर्कियन तथा प्रीकैम्ब्रियन काल की ग्रेनाइट, नीस और अन्य कायांतरित चट्टानें मिलती हैं। इसके विपरीत हिमालय युवा वलित पर्वत हैं और उत्तरी मैदान मुख्यतः नदियों के नवीन जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं।

  2. आर्कियन चट्टानों की प्रमुख विशेषता क्या है?

    Options:
    1. वे केवल जीवाश्म ईंधन से बनी हैं
    2. वे अत्यंत प्राचीन और प्रायः कायांतरित चट्टानें हैं
    3. वे केवल हाल के नदी निक्षेप हैं
    4. वे केवल समुद्र तल पर मिलती हैं

    Correct Option: B

    Explanation:

    आर्कियन चट्टानें पृथ्वी की सबसे प्राचीन चट्टानी इकाइयों में गिनी जाती हैं। भारत में ग्रेनाइट, नीस और अन्य क्रिस्टलीय चट्टानें प्रायद्वीपीय ढाल के कई हिस्सों में मिलती हैं। लंबे भूवैज्ञानिक इतिहास में ताप, दबाव और रूपांतरण ने इनके वर्तमान स्वरूप को प्रभावित किया।

  3. धारवाड़ शैल-समूह आर्थिक रूप से क्यों महत्त्वपूर्ण है?

    Options:
    1. इनमें लौह अयस्क, सोना और अन्य धात्विक खनिज मिलते हैं
    2. इनमें खनिज संसाधन नहीं मिलते
    3. इनमें केवल पेट्रोलियम मिलता है
    4. ये पूरी तरह हिमानी निक्षेप हैं

    Correct Option: A

    Explanation:

    धारवाड़ शैल-समूह प्राचीन ज्वालामुखीय तथा अवसादी पदार्थों के रूपांतरण से बने शैलों से जुड़ा है। इनमें लौह अयस्क, सोना, मैंगनीज और अन्य धात्विक खनिजों के निक्षेप मिलते हैं। इसलिए धारवाड़ क्षेत्र भारत के खनिज-आधारित उद्योगों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

  4. कुडप्पा शैल-समूह में सामान्यतः किस प्रकार की चट्टानें मिलती हैं?

    Options:
    1. केवल आधुनिक प्रवाल चट्टानें
    2. बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और शेल
    3. केवल नवीन जलोढ़ निक्षेप
    4. केवल हिमानी टिल

    Correct Option: B

    Explanation:

    कुडप्पा शैल-समूह प्रायद्वीपीय भारत के प्राचीन अवसादी शैल-समूहों में से है। इसमें बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, शेल और संबंधित चट्टानें मिलती हैं। ये चट्टानें पुराने भू-पृष्ठ पर अवसादों के जमाव और बाद की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से बनीं। कुडप्पा बेसिन आंध्र प्रदेश के भूविज्ञान में महत्त्वपूर्ण है।

  5. विंध्यन शैल-समूह की प्रमुख चट्टानें कौन-सी हैं?

    Options:
    1. केवल ग्रेनाइट और नीस
    2. केवल नवीन समुद्री रेत
    3. बलुआ पत्थर, शेल और चूना पत्थर
    4. केवल बेसाल्टिक लावा

    Correct Option: C

    Explanation:

    विंध्यन शैल-समूह मुख्यतः अवसादी चट्टानों से बना है। बलुआ पत्थर, शेल और चूना पत्थर इसकी प्रमुख चट्टानें हैं। मध्य भारत में इसका व्यापक विस्तार है और इनका उपयोग भवन निर्माण तथा अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में हीरे की उपस्थिति भी महत्त्वपूर्ण है।

  6. गोंडवाना शैल-समूह किस संसाधन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है?

    Options:
    1. कोयला
    2. बॉक्साइट का एकमात्र स्रोत
    3. समुद्री नमक का एकमात्र स्रोत
    4. प्रवाल भित्तियाँ

    Correct Option: A

    Explanation:

    गोंडवाना शैल-समूह में प्राचीन वनस्पति पदार्थों के अवसादी निक्षेपों से बने कोयले के बड़े भंडार मिलते हैं। दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी घाटियों के अनेक कोयला क्षेत्र इसी समूह से संबंधित हैं। भारत की ऊर्जा आपूर्ति और ताप विद्युत उत्पादन में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

  7. गोंडवाना कोयले के निर्माण के लिए कौन-सी परिस्थितियाँ अनुकूल थीं?

    Options:
    1. रेगिस्तान में नमक का निक्षेप
    2. दलदली बेसिनों में वनस्पति पदार्थ का संचय और दबना
    3. हिमनदों के नीचे लावा जमाव
    4. गहरे महासागर में प्रवाल वृद्धि

    Correct Option: B

    Explanation:

    गोंडवाना अवसाद नदीय और झील-संबंधी बेसिनों में जमा हुए। दलदली, वनस्पति-समृद्ध परिस्थितियों में पौधों के अवशेष दबकर समय के साथ ताप और दबाव के प्रभाव से कोयले में बदल सकते हैं। इसलिए गोंडवाना शैलों में बलुआ पत्थर, शेल और कोयले की परतें साथ मिलती हैं।

  8. दक्कन ट्रैप का निर्माण मुख्यतः किस प्रक्रिया से हुआ?

    Options:
    1. चूना पत्थर के रासायनिक निक्षेपण से
    2. हिमनदों द्वारा मोरेन जमा होने से
    3. नदियों द्वारा जलोढ़ पंख बनने से
    4. दरारों से निकले विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाहों से

    Correct Option: D

    Explanation:

    दक्कन ट्रैप का निर्माण क्रिटेशियस काल के अंतिम भाग के आसपास हुए विशाल ज्वालामुखीय उद्गारों से जुड़ा है। दरारों से निकला बेसाल्टिक लावा बार-बार फैलकर व्यापक परतें बनाता गया। सीढ़ीनुमा स्थलरूप के कारण इसे 'ट्रैप' कहा जाता है।

  9. दक्कन ट्रैप की चट्टानों का प्रमुख प्रकार क्या है?

    Options:
    1. संगमरमर
    2. लिग्नाइट
    3. बेसाल्ट
    4. क्वार्ट्जाइट

    Correct Option: C

    Explanation:

    दक्कन ट्रैप मुख्यतः बेसाल्टिक आग्नेय चट्टानों से बना है। बेसाल्ट तब बनता है जब लावा धरातल पर ठंडा होकर ठोस हो जाता है। दक्कन क्षेत्र में लावा के अनेक प्रवाह एक के ऊपर एक जमा हुए, जिससे व्यापक पठारी भूभाग और सीढ़ीनुमा ढालें विकसित हुईं।

  10. दक्कन ट्रैप के अपक्षय से किस मिट्टी का विकास व्यापक रूप से जुड़ा है?

    Options:
    1. पीट मिट्टी
    2. काली मिट्टी
    3. केवल लवणीय मरुस्थलीय मिट्टी
    4. केवल लाल-पीली रेतीली मिट्टी

    Correct Option: B

    Explanation:

    बेसाल्टिक चट्टानों के अपक्षय से दक्कन क्षेत्र में कई स्थानों पर काली मिट्टी विकसित हुई है। इसमें चिकनी मिट्टी के खनिज नमी धारण करने की क्षमता बढ़ाते हैं। यही कारण है कि काली मिट्टी कपास की खेती के लिए अनेक क्षेत्रों में उपयुक्त मानी जाती है।

  11. हिमालय का निर्माण किस भूवैज्ञानिक प्रक्रिया से संबंधित है?

    Options:
    1. भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों की टक्कर तथा वलन से
    2. केवल नदी निक्षेप से
    3. दक्कन ट्रैप के लावा प्रवाह से
    4. भारतीय प्लेट के स्थिर रहने से

    Correct Option: A

    Explanation:

    भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़कर यूरेशियाई प्लेट से टकराई। इस टक्कर से टेथिस सागर में जमा अवसाद संपीड़ित होकर मुड़े और ऊपर उठे, जिससे हिमालयी पर्वत-तंत्र विकसित हुआ। यह प्रक्रिया जारी है, इसलिए हिमालय भूवैज्ञानिक दृष्टि से युवा और सक्रिय पर्वत-तंत्र है।

  12. टेथिस सागर का भारतीय भूवैज्ञानिक इतिहास में क्या महत्त्व है?

    Options:
    1. इसका हिमालय से कोई संबंध नहीं
    2. यह बंगाल की खाड़ी का दूसरा नाम है
    3. इसने दक्कन ट्रैप के सभी लावा प्रवाह बनाए
    4. इसके अवसादों के संपीड़न और उत्थान ने हिमालय निर्माण में योगदान दिया

    Correct Option: D

    Explanation:

    टेथिस सागर प्राचीन समुद्री क्षेत्र था जो भारतीय और यूरेशियाई भूभागों के बीच स्थित था। इसके तल पर लंबे समय तक अवसाद जमा हुए। दोनों प्लेटों की टक्कर पर इन अवसादों का संपीड़न, वलन और उत्थान हुआ, जिसने हिमालय के निर्माण में योगदान दिया।

  13. उत्तरी मैदान प्रायद्वीपीय पठार की तुलना में भूवैज्ञानिक रूप से नवीन क्यों हैं?

    Options:
    1. दोनों की उत्पत्ति बिल्कुल समान है
    2. वे नदियों द्वारा जमा किए गए जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं
    3. वे आर्कियन ग्रेनाइट से बने हैं
    4. वे केवल ज्वालामुखीय लावा से बने हैं

    Correct Option: B

    Explanation:

    उत्तरी मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं। ये निक्षेप प्रायद्वीपीय पठार की प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों की तुलना में बहुत नवीन हैं। नदियाँ आज भी तलछट जमा करती हैं, इसलिए मैदानों का निर्माण और परिवर्तन जारी है।

  14. भारत में प्राचीन हिमानी निक्षेपों के प्रमाण किस शैल-समूह की तलचर शृंखला में मिलते हैं?

    Options:
    1. गोंडवाना समूह
    2. नवीन गंगा जलोढ़
    3. अरावली संगमरमर
    4. दक्कन ट्रैप

    Correct Option: A

    Explanation:

    गोंडवाना समूह की तलचर शृंखला में हिमानी उत्पत्ति से संबंधित निक्षेपों के प्रमाण मिलते हैं। टिलाइट और संबंधित अवसादी विशेषताएँ प्राचीन जलवायु तथा गोंडवाना भूभाग की स्थिति समझने में मदद करती हैं। ये प्रमाण बताते हैं कि आज के भारत के कुछ भाग अतीत में अलग जलवायवीय परिस्थितियों से गुजरे थे।

  15. अरावली और धारवाड़ की प्राचीन चट्टानें व्यापक रूप से किस समय-विभाग से जुड़ी हैं?

    Options:
    1. प्रीकैम्ब्रियन
    2. क्वाटरनरी
    3. जुरासिक
    4. होलोसीन

    Correct Option: A

    Explanation:

    अरावली और धारवाड़ चट्टानें व्यापक रूप से प्रीकैम्ब्रियन भूवैज्ञानिक इतिहास से संबंधित हैं। यह पृथ्वी के इतिहास का अत्यंत लंबा और प्राचीन भाग है, जिसमें प्राचीन भू-पर्पटी, क्रिस्टलीय चट्टानें और अनेक धात्विक खनिज निक्षेप विकसित हुए। इनके अध्ययन से भारतीय प्रायद्वीपीय ढाल के प्रारंभिक विकास की जानकारी मिलती है।

  16. प्रायद्वीपीय भारत में खनिज संसाधनों की विविधता का प्रमुख भूवैज्ञानिक कारण क्या है?

    Options:
    1. किसी प्रकार की भूवैज्ञानिक प्रक्रिया न होना
    2. पूरा क्षेत्र आधुनिक हिमनदों से ढका होना
    3. सभी चट्टानों का हाल में जमा होना
    4. विभिन्न आयु की आग्नेय, कायांतरित और अवसादी चट्टानों का विकास

    Correct Option: D

    Explanation:

    प्रायद्वीपीय भारत में अनेक कालों की आग्नेय, कायांतरित और अवसादी चट्टानें मिलती हैं। चट्टानों के निर्माण, रूपांतरण, भ्रंशन और अपक्षय ने लौह अयस्क, मैंगनीज, सोना, बॉक्साइट, चूना पत्थर और कोयले जैसे संसाधनों के वितरण को प्रभावित किया। खनिजों का स्थान भूवैज्ञानिक संरचना से गहराई से जुड़ा है।

  17. नर्मदा और ताप्ती घाटियों का भूवैज्ञानिक महत्त्व किससे संबंधित है?

    Options:
    1. प्रवाल द्वीपों के निर्माण से
    2. समुद्री ज्वारीय निक्षेप से
    3. भ्रंश और संरचनात्मक नियंत्रण से विकसित रेखीय घाटियाँ
    4. हिमालयी हिमनदों के विस्तार से

    Correct Option: C

    Explanation:

    नर्मदा और ताप्ती घाटियाँ प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख रेखीय घाटियों में गिनी जाती हैं। इनके विकास में भ्रंश और संरचनात्मक नियंत्रण की भूमिका रही है। ये घाटियाँ प्राचीन भू-पर्पटी की दरारों और कमजोर क्षेत्रों से जुड़ी हैं; इनके आसपास अवसादी बेसिन भी मिलते हैं।

  18. प्रायद्वीपीय भारत के क्रेटोनिक भूभाग की प्रमुख विशेषता क्या है?

    Options:
    1. यह नवीन जलोढ़ मैदान है
    2. यह पूरी तरह सक्रिय द्वीप चाप है
    3. यह केवल हिमनदों से बना है
    4. यह प्राचीन और अपेक्षाकृत स्थिर भू-पर्पटी का भाग है

    Correct Option: D

    Explanation:

    प्रायद्वीपीय भारत का बड़ा भाग प्राचीन क्रेटोनिक भूभाग से संबंधित है, जो लंबे भूवैज्ञानिक समय में अपेक्षाकृत स्थिर रहा है। इसमें प्राचीन आग्नेय और कायांतरित चट्टानों का आधार मिलता है। इसके विपरीत हिमालय और अंडमान-निकोबार क्षेत्र सक्रिय प्लेट सीमाओं से जुड़े हैं।

  19. भूवैज्ञानिक समय-सारिणी में महाकल्प और युग का सही संबंध क्या है?

    Options:
    1. युग हमेशा महाकल्प से बड़ा होता है
    2. दोनों केवल चट्टानों के प्रकार हैं
    3. महाकल्प बड़ा समय-विभाग है और उसके भीतर छोटे समय-विभाग आते हैं
    4. इनका भूविज्ञान में उपयोग नहीं होता

    Correct Option: C

    Explanation:

    भूवैज्ञानिक समय को बड़े और छोटे समय-विभागों में व्यवस्थित किया जाता है। सामान्य क्रम में महाकल्प (Era) के भीतर काल (Period) और उससे छोटे युग/एपोक (Epoch) जैसे विभाजन आते हैं। इस क्रम से चट्टानों, जीवाश्मों, पर्वत-निर्माण और जलवायु परिवर्तन की घटनाओं को कालक्रम में समझा जाता है।

  20. विंध्यन शैल-समूह में हीरे की उपस्थिति के लिए कौन-सा क्षेत्र प्रसिद्ध है?

    Options:
    1. राजस्थान का थार क्षेत्र
    2. केरल का मालाबार तट
    3. मध्य प्रदेश का पन्ना क्षेत्र
    4. असम का ब्रह्मपुत्र मैदान

    Correct Option: C

    Explanation:

    मध्य प्रदेश का पन्ना क्षेत्र हीरे के निक्षेपों के लिए प्रसिद्ध है और इसका भूवैज्ञानिक संबंध विंध्यन शैल-समूह से है। विंध्यन चट्टानों में बलुआ पत्थर, शेल और चूना पत्थर व्यापक हैं। खनिज संसाधनों का वितरण स्थानीय भूगर्भिक संरचना और निक्षेपण के इतिहास से जुड़ा होता है।