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भारत में ताप विद्युत शक्ति (Thermal Power): ऐतिहासिक विकास, वितरण, प्रमुख केंद्र एवं स्थानिक वितरण

ताप विद्युत भारत की बिजली व्यवस्था का एक प्रमुख आधार है। इसमें कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस और डीजल जैसे ईंधनों को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न की जाती है। इस ऊष्मा से भाप या गैस टरबाइन चलती है और जनरेटर के माध्यम से विद्युत ऊर्जा पैदा होती है। भारत में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की भूमिका विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये बड़े पैमाने पर लगातार बिजली उपलब्ध करा सकते हैं।

ताप विद्युत शक्ति क्या है?

ताप विद्युत शक्ति वह विद्युत ऊर्जा है जो ईंधन से प्राप्त ऊष्मा को यांत्रिक ऊर्जा और फिर विद्युत ऊर्जा में बदलकर उत्पन्न की जाती है।

कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र में कोयले को बॉयलर में जलाया जाता है। इससे पानी भाप में बदलता है। उच्च दबाव वाली भाप टरबाइन को घुमाती है और टरबाइन से जुड़ा जनरेटर बिजली उत्पन्न करता है। इसके बाद भाप को ठंडा करके पानी में बदला जाता है और प्रक्रिया दोबारा चलती है।

कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र का कार्यप्रवाह

भारत में ताप विद्युत का ऐतिहासिक विकास

स्वतंत्रता के बाद भारत में उद्योगों, रेलवे, शहरीकरण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ बिजली की माँग तेजी से बढ़ी। इस माँग को पूरा करने के लिए कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों का विकास किया गया।

  • 1950–51: भारत की स्थापित ताप विद्युत क्षमता लगभग 1,098 MW थी और ताप विद्युत उत्पादन लगभग 2,779 मिलियन kWh था।
  • 2006–07: स्थापित ताप विद्युत क्षमता लगभग 93,700 MW तक पहुँच गई और उत्पादन लगभग 535,500 मिलियन kWh दर्ज किया गया।
  • NTPC की स्थापना: वर्ष 1975 में राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) की स्थापना हुई। इसने बड़े ताप विद्युत संयंत्रों के विकास और राष्ट्रीय स्तर पर बिजली उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • आधुनिक विकास: सुपरक्रिटिकल और अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक अपनाकर ईंधन दक्षता बढ़ाने और प्रति इकाई बिजली उत्पादन पर उत्सर्जन घटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत में ताप विद्युत की वर्तमान स्थापित क्षमता

विद्युत मंत्रालय के अनुसार, 31 जनवरी 2026 को भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 5,20,511 MW थी। इसमें कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस और डीजल सहित जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 2,48,542 MW थी।

ऊर्जा स्रोतस्थापित क्षमता (MW)कुल क्षमता में हिस्सा
कोयला2,21,21042.50%
लिग्नाइट6,6201.30%
प्राकृतिक गैस20,1223.90%
डीजल5890.10%
कुल जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता2,48,54247.70%

स्रोत: विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार, Press Information Bureau

यहाँ स्थापित क्षमता और वास्तविक बिजली उत्पादन में अंतर समझना आवश्यक है। स्थापित क्षमता संयंत्र की अधिकतम निर्धारित उत्पादन क्षमता है, जबकि वास्तविक उत्पादन ईंधन की उपलब्धता, माँग, रखरखाव, तकनीकी स्थिति और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

भारत में ताप विद्युत का स्थानीय वितरण

भारत में ताप विद्युत की स्थापित क्षमता का स्थानीय वितरण असमान है। दिसंबर 2025 के राज्यवार आँकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयला आधारित ताप विद्युत क्षमता 24,093 मेगावाट, गुजरात में 14,692 मेगावाट कोयला, 1,400 मेगावाट लिग्नाइट तथा 6,580 मेगावाट गैस आधारित क्षमता थी। महाराष्ट्र में कोयला आधारित क्षमता 23,000 मेगावाट से अधिक, मध्य प्रदेश में लगभग 20,000 मेगावाट तथा उत्तर प्रदेश में लगभग 15,000 मेगावाट थी। इन राज्यों में कोयला आधारित ताप विद्युत का विशेष महत्त्व है।

छत्तीसगढ़ में कोयला आधारित ताप विद्युत की सर्वाधिक प्रमुखता दिखाई देती है। दिसंबर 2025 में राज्य की कोयला आधारित स्थापित क्षमता 24,093 मेगावाट थी। कोरबा, सीपत और लारा इसके प्रमुख ताप विद्युत केंद्र हैं। गुजरात में कोयला, लिग्नाइट और प्राकृतिक गैस तीनों पर आधारित संयंत्र हैं। यहाँ कोयला आधारित क्षमता 14,692 मेगावाट, लिग्नाइट आधारित क्षमता 1,400 मेगावाट तथा गैस आधारित क्षमता 6,580 मेगावाट थी। उकाई, गांधीनगर, सिक्का तथा मुंद्रा प्रमुख विद्युत केंद्रों में शामिल हैं।

महाराष्ट्र में कोराडी, चंद्रपुर, नासिक, भुसावल और मौदा प्रमुख ताप विद्युत केंद्र हैं। मध्य प्रदेश में विंध्याचल, सिंगरौली, सतपुड़ा और गदरवारा प्रमुख हैं। उत्तर प्रदेश में सिंगरौली, रिहंद, दादरी, ओबरा, ऊँचाहार और टांडा ताप विद्युत उत्पादन में योगदान देते हैं। इन राज्यों में कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों का महत्त्व अधिक है।

ओडिशा में तालचर और दर्लिपाली, तमिलनाडु में नेवेली, तूतीकोरिन और नॉर्थ चेन्नई तथा आंध्र प्रदेश में सिम्हाद्रि प्रमुख ताप विद्युत केंद्र हैं। बिहार में बाढ़, कहलगाँव और बरौनी तथा झारखंड में पतरातू जैसे केंद्र महत्त्वपूर्ण हैं। हरियाणा में पानीपत तथा झज्जर स्थित ताप विद्युत केंद्र उल्लेखनीय हैं। असम में बोंगाईगाँव और अन्य ताप विद्युत केंद्र राज्य की विद्युत व्यवस्था में योगदान देते हैं।

इस प्रकार, भारत में ताप विद्युत का वितरण मुख्यतः कोयला एवं अन्य ईंधनों की उपलब्धता, विद्युत की माँग, परिवहन सुविधाओं तथा औद्योगिक विकास से संबंधित है।

प्रमुख ताप विद्युत राज्य और उनके केंद्र

राज्यप्रमुख ताप विद्युत केंद्रप्रमुख भौगोलिक आधार
उत्तर प्रदेशसिंगरौली, रिहंद, ओबरा, अनपरा, दादरी, ऊँचाहार, टांडाकोयला आपूर्ति, बड़े उपभोक्ता और राष्ट्रीय ग्रिड
मध्य प्रदेशविंध्याचल, सतपुड़ा, अमरकंटक, सासन, खंडवा क्षेत्र के संयंत्रकोयला परिवहन और क्षेत्रीय बिजली माँग
छत्तीसगढ़कोरबा, सीपत, लारा, रायगढ़ क्षेत्र के संयंत्रकोयला भंडार और खनन क्षेत्र
झारखंडबोकारो, चंद्रपुरा, पतरातू, नॉर्थ करणपुराझरिया एवं अन्य कोयला क्षेत्रों की निकटता
ओडिशातालचेर-कनिहा, तालचेर, दर्लीपालीतालचेर कोयला क्षेत्र और औद्योगिक माँग
बिहारकहलगाँव, बरौनी, कांटी, बाढ़, नवीनगरकोयला आपूर्ति और पूर्वी भारत की माँग
पश्चिम बंगालफरक्का, दुर्गापुर, बंडेल, कोलाघाटरानीगंज कोयला क्षेत्र, उद्योग और परिवहन
महाराष्ट्रचंद्रपुर, कोराडी, खापरखेड़ा, भुसावल, मौदा, सोलापुरकोयला आपूर्ति और बड़े शहरी-औद्योगिक बाजार
गुजरातमुंद्रा, उकाई, वानकबोरी, कच्छ क्षेत्र के संयंत्रबंदरगाह, आयातित कोयला और औद्योगिक माँग
हरियाणापानीपत, यमुनानगर, झज्जरदिल्ली-NCR तथा राज्य की बिजली माँग
तमिलनाडुनेवेली, उत्तरी चेन्नई, तूतीकोरिन क्षेत्रलिग्नाइट, बंदरगाह और औद्योगिक उपभोक्ता
आंध्र प्रदेशसिम्हाद्री, कृष्णापट्टनम क्षेत्र के संयंत्रतटीय स्थिति, बंदरगाह और बिजली माँग
तेलंगानारामागुंडम, कोठागुडेम, यदाद्रीकोयला क्षेत्र और औद्योगिक माँग
कर्नाटकरायचूर, बेल्लारी, कुडगीकोयला आपूर्ति और दक्षिण भारतीय ग्रिड
असमबोंगाईगाँव, लाकवा, नामरूपस्थानीय गैस संसाधन और क्षेत्रीय बिजली माँग
केरलकोच्चि तथा अन्य गैस/तरल ईंधन आधारित संयंत्रगैस आपूर्ति, तटीय अवसंरचना और शहरी माँग

भारत के प्रमुख ताप विद्युत गृह

नीचे दिए गए संयंत्रों को उनके स्थान, राज्य और स्थापित क्षमता के आधार पर याद करना उपयोगी है। क्षमता के आँकड़े NTPC की आधिकारिक स्टेशन सूची में प्रकाशित क्षमता पर आधारित हैं; राज्य एवं निजी क्षेत्र के कुछ अन्य संयंत्र इसमें शामिल नहीं हैं।

भारत के प्रमुख ताप विद्युत गृह  और उनकी स्थापित क्षमता

क्र.ताप विद्युत गृहराज्यस्थापित क्षमता (MW)
1विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशनमध्य प्रदेश4,760
2सिंगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशनउत्तर प्रदेश2,000
3रिहंद सुपर थर्मल पावर स्टेशनउत्तर प्रदेश3,000
4कोरबा सुपर थर्मल पावर स्टेशनछत्तीसगढ़2,600
5सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशनछत्तीसगढ़2,980
6रामागुंडम सुपर थर्मल पावर स्टेशनतेलंगाना2,600
7तालचेर-कनिहा सुपर थर्मल पावर स्टेशनओडिशा3,000
8कहलगाँव सुपर थर्मल पावर स्टेशनबिहार2,340
9फरक्का सुपर थर्मल पावर स्टेशनपश्चिम बंगाल2,100
10दादरी ताप विद्युत स्टेशनउत्तर प्रदेश1,840
11ऊँचाहार ताप विद्युत स्टेशनउत्तर प्रदेश1,550
12बाढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशनबिहार3,300
13नॉर्थ करणपुरा ताप विद्युत स्टेशनझारखंड1,980
14गदरवारा सुपर थर्मल पावर स्टेशनमध्य प्रदेश1,600
15खड़गोन सुपर थर्मल पावर स्टेशनमध्य प्रदेश1,320
16मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशनमहाराष्ट्र2,320
17सोलापुर सुपर थर्मल पावर स्टेशनमहाराष्ट्र1,320
18कुडगी सुपर थर्मल पावर स्टेशनकर्नाटक2,400
19सिम्हाद्री सुपर थर्मल पावर स्टेशनआंध्र प्रदेश2,000
20तेलंगाना सुपर थर्मल पावर स्टेशनतेलंगाना1,600
21दर्लीपाली सुपर थर्मल पावर स्टेशनओडिशा1,600
22बोंगाईगाँव ताप विद्युत स्टेशनअसम750
23झज्जर इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्टहरियाणा1,500
24मेजा ताप विद्युत परियोजनाउत्तर प्रदेश1,320
25पतरातू ताप विद्युत परियोजनाझारखंड1,600
26नबीनगर ताप विद्युत परियोजना (BRBCL)बिहार1,000
27वल्लूर ताप विद्युत परियोजनातमिलनाडु1,500

Source: NTPC Limited

भारत के प्रमुख गैस आधारित ताप विद्युत केंद्र

गैस आधारित केंद्रराज्यविशेष तथ्य
औरैया गैस पावर स्टेशनउत्तर प्रदेशप्राकृतिक गैस आधारित
दादरी गैस पावर स्टेशनउत्तर प्रदेशदिल्ली-NCR क्षेत्र की आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ा
कावास गैस पावर स्टेशनगुजरातगैस आधारित संयुक्त चक्र संयंत्र
गांधार गैस पावर स्टेशनगुजरातप्राकृतिक गैस आधारित
अंता गैस पावर स्टेशनराजस्थानगैस आधारित विद्युत उत्पादन
रामागुंडम गैस आधारित परियोजनातेलंगानागैस आधारित बिजली उत्पादन
कोच्चि गैस आधारित विद्युत स्टेशनकेरलगैस आपूर्ति पर निर्भर

गैस आधारित संयंत्रों की उपलब्धता ईंधन की आपूर्ति और लागत पर निर्भर करती है। इसलिए उनकी स्थापित क्षमता और वास्तविक उत्पादन में उल्लेखनीय अंतर हो सकता है।

भारत में अल्ट्रा मेगा पावर परियोजनाएँ (UMPPs)

अल्ट्रा मेगा पावर परियोजनाओं का उद्देश्य बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन करके देश की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करना है। ऐसी परियोजनाओं की नियोजित क्षमता सामान्यतः लगभग 4,000 MW या उससे अधिक रखी जाती है।

परियोजनाराज्यप्रमुख तथ्य
मुंद्रा UMPPगुजराततटीय स्थिति और आयातित कोयले पर आधारित परियोजना
सासन UMPPमध्य प्रदेशकोयला आधारित बड़ी परियोजना
कृष्णापट्टनम UMPPआंध्र प्रदेशतटीय क्षेत्र में नियोजित बड़ी परियोजना
तिलैया UMPPझारखंडप्रस्तावित बड़ी कोयला आधारित परियोजना

ताप विद्युत का महत्त्व

बिजली की निरंतर आपूर्ति: कोयला आधारित संयंत्र मौसम पर सीधे निर्भर नहीं होते, इसलिए वे ग्रिड की आधारभूत बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण हैं।

औद्योगिक विकास: इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, खनन और विनिर्माण जैसे उद्योगों को बड़ी मात्रा में बिजली मिलती है।

रोजगार और क्षेत्रीय विकास: खनन, परिवहन, संयंत्र संचालन और रखरखाव में रोजगार उत्पन्न होता है।

ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू कोयला संसाधन बिजली उत्पादन में योगदान देते हैं, हालांकि कुछ संयंत्र आयातित कोयले पर भी निर्भर हैं।

बिजली ग्रिड का संतुलन: ताप विद्युत संयंत्र बिजली की माँग पूरी करने में मदद करते हैं, जबकि सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में बदलाव के अनुसार संचालन समायोजित किया जा सकता है।

ताप विद्युत की प्रमुख समस्याएँ

  • वायु प्रदूषण: कोयला आधारित संयंत्रों से सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कण पदार्थ और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हो सकता है।
  • कोयले की राख: फ्लाई ऐश के सुरक्षित भंडारण और उपयोग की आवश्यकता होती है।
  • जल की अधिक खपत: शीतलन और भाप उत्पादन के लिए पर्याप्त जल की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: कोयला आधारित बिजली उत्पादन जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है।
  • ईंधन परिवहन लागत: कोयला खदानों से दूर स्थित संयंत्रों में परिवहन लागत बढ़ सकती है।
  • तकनीकी दक्षता: पुराने संयंत्रों में ईंधन की खपत और प्रति इकाई बिजली उत्पादन की लागत अधिक हो सकती है।

FAQs

प्रश्न 1. भारत में ताप विद्युत का प्रमुख स्रोत कौन-सा है?

उत्तर: कोयला। भारत में कोयला आधारित संयंत्र ताप विद्युत उत्पादन की व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा हैं।

प्रश्न 2. NTPC की स्थापना कब हुई थी?

उत्तर: NTPC की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। यह भारत की प्रमुख विद्युत उत्पादन कंपनियों में से एक है।

प्रश्न 3. ताप विद्युत और जल विद्युत में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: ताप विद्युत में ईंधन से प्राप्त ऊष्मा द्वारा बिजली बनाई जाती है, जबकि जल विद्युत में बहते या ऊँचाई से गिरते पानी की ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।

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