भारत का भूगोल MCQs
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दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य आगमन सबसे पहले किस राज्य के तट पर माना जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य आगमन केरल तट पर जून के आरंभ में माना जाता है। इसके बाद मानसून देश के अन्य भागों में आगे बढ़ता है। आगमन की वास्तविक तारीख हर वर्ष बदल सकती है, इसलिए इसे एक सामान्य मौसमी क्रम समझना चाहिए, निश्चित वार्षिक तारीख नहीं।
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मानसून का विराम (break in monsoon) किस स्थिति को दर्शाता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
मानसून का विराम मानसूनी मौसम के दौरान ऐसा अंतराल है जब कई क्षेत्रों में वर्षा घट जाती है या उसका वितरण बदल जाता है। यह मानसूनी द्रोणी की स्थिति और वायुमंडलीय परिसंचरण से संबंधित होता है। इसका प्रभाव भारत के अलग-अलग भागों में अलग हो सकता है।
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मानसून की अनिश्चितता कृषि को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
भारत की कृषि का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर है। मानसून देर से आए, कमजोर रहे, बहुत अधिक वर्षा करे या लंबे विराम हों, तो बुवाई, मिट्टी की नमी, सिंचाई की मांग और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए मानसून का समय और क्षेत्रीय वितरण दोनों महत्वपूर्ण हैं।
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ऊँचाई का भारतीय जलवायु पर प्रभाव किस उदाहरण से स्पष्ट होता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
सामान्य परिस्थितियों में ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडलीय तापमान घटता है। इस कारण हिमालयी क्षेत्रों में मैदानों की तुलना में अधिक ठंड रहती है और ऊँचे भागों में हिमपात भी हो सकता है। ढाल, दिशा और स्थानीय मौसम के कारण वास्तविक दशाओं में अंतर संभव है।
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कर्क रेखा का भारत से गुजरना किस प्रकार की जलवायु विविधता से जुड़ा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
कर्क रेखा भारत के मध्य भाग से गुजरती है। इसके दक्षिण के क्षेत्र सामान्यतः उष्ण कटिबंधीय प्रभाव में हैं, जबकि उत्तर के बड़े भाग में उपोष्ण दशाओं का प्रभाव भी मिलता है। वास्तविक जलवायु अक्षांश के साथ-साथ ऊँचाई, स्थलाकृति और समुद्री प्रभाव से भी निर्धारित होती है।
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भारत में ऋतुओं का मौसमी चक्र मुख्यतः किससे जुड़ा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पृथ्वी की परिक्रमा और अक्षीय झुकाव के कारण सौर ऊष्मा का मौसमी वितरण बदलता है। स्थल और समुद्र के असमान ताप, दाब-प्रणालियों और मानसूनी परिसंचरण के साथ मिलकर भारत में ग्रीष्म, वर्षा, शरद और शीत ऋतु की विशिष्ट दशाएँ बनती हैं।
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स्थल-समुद्र तापांतर भारतीय मानसून के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
स्थल समुद्र की तुलना में जल्दी गर्म और जल्दी ठंडा होता है। इससे ऋतुओं के अनुसार स्थल और समुद्र के ऊपर वायुदाब में अंतर बन सकता है, जो मानसूनी पवनों के मौसमी बदलाव में योगदान देता है। यह भारतीय मानसूनी जलवायु की व्याख्या का एक महत्वपूर्ण आधार है।
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भारतीय जलवायु की विशेषताओं का सबसे उपयुक्त सार कौन-सा है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
भारतीय जलवायु की प्रमुख पहचान मानसूनी परिसंचरण है, लेकिन इसकी प्रकृति पूरे देश में समान नहीं है। अक्षांश, ऊँचाई, पर्वतीय अवरोध, समुद्र से दूरी और मौसमी प्रणालियाँ तापमान तथा वर्षा को प्रभावित करती हैं। मानसून की अनिश्चितता कृषि और जल संसाधनों पर भी असर डाल सकती है।
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भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में कौन-सा शामिल है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
अक्षांशीय स्थिति किसी स्थान पर प्राप्त सौर ऊर्जा और तापमान को प्रभावित करती है। भारत का उत्तर-दक्षिण विस्तार बड़ा है, इसलिए दक्षिणी और उत्तरी भागों में तापीय दशाओं में अंतर मिलता है। हालांकि जलवायु केवल अक्षांश से नहीं, बल्कि ऊँचाई, स्थलाकृति, समुद्र से दूरी और पवन प्रणालियों से भी प्रभावित होती है।
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कर्क रेखा का भारत की जलवायु पर क्या प्रभाव है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
कर्क रेखा भारत के लगभग मध्य भाग से गुजरती है। इसके दक्षिण का भाग उष्ण कटिबंधीय प्रभाव में रहता है, जबकि उत्तर के बड़े हिस्से में उपोष्ण दशाओं का प्रभाव भी दिखाई देता है। वास्तविक जलवायु पर अक्षांश के साथ ऊँचाई, समुद्र से दूरी और स्थलाकृति का भी असर पड़ता है।
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समुद्र से दूरी किसी क्षेत्र की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
समुद्र धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है, इसलिए तटीय क्षेत्रों में तापमान का वार्षिक अंतर अपेक्षाकृत कम रहता है। समुद्र से दूर आंतरिक क्षेत्रों में स्थल जल्दी गर्म और ठंडा होता है, जिससे गर्मी और सर्दी अधिक तीव्र हो सकती है। इसे समुद्री और महाद्वीपीय प्रभाव के अंतर से समझते हैं।
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समुद्र से दूर स्थित आंतरिक क्षेत्रों की जलवायु में सामान्यतः कौन-सी विशेषता मिलती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
आंतरिक क्षेत्रों में समुद्र का ताप-संतुलन प्रभाव कम होता है। स्थल गर्मियों में जल्दी गर्म और सर्दियों में जल्दी ठंडा होता है, इसलिए तापमान का वार्षिक अंतर तटीय क्षेत्रों से अधिक रहता है। उत्तर-पश्चिमी भारत में यह महाद्वीपीय प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
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ऊँचाई बढ़ने पर तापमान सामान्यतः कैसा बदलता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
क्षोभमंडल में सामान्यतः ऊँचाई बढ़ने के साथ वायु का तापमान घटता है। इसी कारण हिमालय के ऊँचे क्षेत्रों में मैदानों की तुलना में ठंड अधिक होती है और ऊँचाई के अनुसार हिमपात भी संभव है। स्थानीय मौसम, ढाल और वायु प्रवाह के कारण कुछ स्थितियों में अपवाद हो सकते हैं।
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हिमालय भारत की जलवायु को किस प्रमुख तरीके से प्रभावित करता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
हिमालय एक विशाल पर्वतीय अवरोध है, जो मध्य एशिया की अत्यधिक ठंडी वायु को भारतीय उपमहाद्वीप तक सीधे पहुँचने से रोकने में मदद करता है। यह मानसूनी पवनों के उत्तर की ओर प्रवाह को भी प्रभावित करता है और कई क्षेत्रों में वर्षा के वितरण में योगदान देता है।
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पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा का मुख्य कारण क्या है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
अरब सागर से आने वाली नम दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती हैं। ऊपर उठने पर वायु ठंडी होती है और जलवाष्प संघनित होकर वर्षा करती है। इसी ओरोग्राफिक प्रक्रिया के कारण पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल और निकटवर्ती तटीय मैदान अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं।
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पश्चिमी घाट के पूर्व में वर्षाछाया क्षेत्र बनने का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर वर्षा के बाद वायु की नमी घट जाती है। पर्वत के दूसरी ओर नीचे उतरती वायु गर्म होती है और उसकी सापेक्ष आर्द्रता कम हो सकती है। इस कारण दक्कन के पठार के कुछ हिस्सों में पश्चिमी ढाल की तुलना में कम वर्षा होती है।
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अरावली पर्वतमाला पश्चिमी राजस्थान में अधिक वर्षा कराने में सीमित क्यों रहती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
अरावली पर्वतमाला की सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है और यह अरब सागर शाखा के प्रवाह के लगभग समानांतर पड़ती है। इसलिए यह पवनों को बड़े पैमाने पर ऊपर उठाने वाला प्रभावी अवरोध नहीं बनती। समुद्र से दूरी और नमी की कमी भी पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा के कारण हैं।
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मेघालय में अत्यधिक वर्षा होने में कौन-सा स्थलाकृतिक कारक महत्वपूर्ण है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पवनें मेघालय की खासी पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं। इससे वायु ठंडी होती है और भारी ओरोग्राफिक वर्षा होती है। मौसिनराम और चेरापूंजी क्षेत्र की अत्यधिक वर्षा में पवनों की नमी और स्थानीय स्थलाकृति दोनों का योगदान है।
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भारतीय मानसून के विकास में स्थल और समुद्र के असमान गर्म होने का क्या महत्व है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
गर्मियों में भारतीय स्थलभाग समुद्र की तुलना में अधिक तेजी से गर्म होता है और स्थल पर निम्न दाब विकसित हो सकता है। समुद्र और स्थल के बीच दाब-अंतर मानसूनी परिसंचरण को प्रभावित करता है। शीत ऋतु में तापीय दशाएँ बदलने से पवनों का सामान्य प्रवाह भी बदल जाता है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में नमी मुख्यतः कहाँ से प्राप्त करता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी सहित आसपास के समुद्री क्षेत्रों से नमी ग्रहण करती हैं। भारत में पहुँचकर ये पवनें वर्षा कराती हैं। पवनों का मार्ग, समुद्र पर बिताया गया समय और स्थलाकृति तय करते हैं कि किस क्षेत्र में कितनी वर्षा होगी।