भारतीय मानसून
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दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में मुख्यतः किन दो शाखाओं में विभाजित होता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
भारत की स्थलाकृति और दोनों ओर स्थित समुद्री क्षेत्रों के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की दो प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं—अरब सागर शाखा तथा बंगाल की खाड़ी शाखा। दोनों शाखाएँ देश के अलग-अलग भागों में वर्षा कराती हैं और आगे चलकर उत्तरी मैदानों के आसपास मिल सकती हैं।
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अरब सागर शाखा सामान्यतः सबसे पहले भारत के किस तट पर मानसूनी वर्षा लाती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य आगमन केरल तट पर जून के आरंभ में माना जाता है। अरब सागर से आने वाली नम पवनें पश्चिमी तट पर पहुँचती हैं और पश्चिमी घाट से टकराकर भारी वर्षा कराती हैं। आगमन की वास्तविक तारीख हर वर्ष बदल सकती है।
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अरब सागर शाखा के कारण पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
नम मानसूनी वायु पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती है। ऊँचाई बढ़ने पर वायु ठंडी होती है, जलवाष्प संघनित होता है और ओरोग्राफिक वर्षा होती है। इसलिए पश्चिमी ढाल और तटीय पट्टी में वर्षा अधिक होती है।
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पश्चिमी घाट के पूर्व में दक्कन के कुछ भागों में अपेक्षाकृत कम वर्षा क्यों होती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पश्चिमी घाट पार करने के बाद वायु का बड़ा भाग नमी खो चुका होता है और नीचे उतरते समय गर्म होता है। इससे सापेक्ष आर्द्रता घटती है तथा पूर्वी ओर वर्षा कम हो सकती है। ऐसे क्षेत्र को वर्षाछाया क्षेत्र कहते हैं।
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अरब सागर शाखा की वह धारा जो मुंबई के उत्तर में तट से टकराकर मध्य भारत की ओर बढ़ती है, मुख्यतः किन घाटियों का अनुसरण करती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा का एक भाग मुंबई के उत्तर में तट से टकराकर नर्मदा और तापी की घाटियों के सहारे मध्य भारत की ओर बढ़ता है। यह मध्य भारत में वर्षा में योगदान देता है और आगे गंगा के मैदान की ओर पहुँच सकता है।
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अरब सागर शाखा की तीसरी प्रमुख धारा किन क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा का एक भाग सौराष्ट्र और कच्छ की ओर बढ़ता है तथा पश्चिमी राजस्थान और अरावली के आसपास आगे जाता है। इस मार्ग में वर्षा सामान्यतः कम होती है, क्योंकि अरावली की दिशा मानसूनी पवनों के लिए प्रभावी अवरोध नहीं बनती।
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अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी राजस्थान में व्यापक वर्षा कराने में सीमित प्रभाव का एक प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
अरावली पर्वतमाला की सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है, जो अरब सागर से आने वाली पवनों के प्रवाह के लगभग समानांतर पड़ती है। इसलिए पवनों को व्यापक रूप से ऊपर उठाने वाला अवरोध कम मिलता है और पश्चिमी राजस्थान में वर्षा कम रहती है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मुड़ने से पहले किस पर्वतीय क्षेत्र से प्रभावित होती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा का एक बड़ा भाग म्यांमार के तटीय अराकान पर्वतों से प्रभावित होकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मुड़ता है। इसके कारण यह पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में दक्षिण या दक्षिण-पूर्व से प्रवेश करती दिखाई दे सकती है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वोत्तर भारत में विशेष रूप से अधिक वर्षा क्यों कराती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करने वाली पवनें पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों से टकराती हैं। खासी और गारो पहाड़ियों जैसे स्थलरूप वायु को ऊपर उठाते हैं, जिससे भारी ओरोग्राफिक वर्षा होती है। मेघालय के कुछ स्थानों पर इसी कारण अत्यधिक वर्षा दर्ज होती है।
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मौसिनराम और चेरापूंजी में अत्यधिक वर्षा का भौगोलिक कारण मुख्यतः क्या है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मौसिनराम और चेरापूंजी मेघालय की खासी पहाड़ियों के निकट स्थित हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली अत्यधिक नम पवनें पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं, जिससे बहुत अधिक वर्षा होती है। स्थानीय स्थलाकृति और पवनों की दिशा इस वर्षा को बढ़ाती है।
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हिमालय के दक्षिणी ढाल और तराई क्षेत्र में अधिक वर्षा होने का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
हिमालय मानसूनी पवनों को उत्तर की ओर स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोकता है और उन्हें ऊपर उठने पर मजबूर करता है। इससे दक्षिणी ढाल तथा हिमालय की तलहटी में वर्षा बढ़ सकती है। पर्वतीय अवरोध मानसून के वितरण का महत्वपूर्ण नियंत्रक है।
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बंगाल की खाड़ी शाखा हिमालय की तलहटी तक पहुँचने के बाद सामान्यतः किस दिशा में मुड़ती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
हिमालय बंगाल की खाड़ी शाखा के उत्तर की ओर विस्तार को रोकता है। परिणामस्वरूप पवनें हिमालय की तलहटी के साथ पश्चिम की ओर मुड़कर गंगा के मैदानों में आगे बढ़ती हैं। इसी प्रक्रिया से पूर्वी और उत्तरी भारत के विस्तृत भागों में वर्षा होती है।
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गंगा के मैदान में सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा घटने का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी भारत में प्रवेश करने के बाद गंगा के मैदान के साथ पश्चिम की ओर बढ़ती है। मार्ग में वर्षा के रूप में नमी निकलती जाती है और समुद्र से दूरी भी बढ़ती है, इसलिए सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा कम होती है। स्थानीय अपवाद संभव हैं।
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पंजाब और हरियाणा में मानसूनी वर्षा के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पंजाब और हरियाणा में बंगाल की खाड़ी शाखा पश्चिम की ओर बढ़ती है और अरब सागर शाखा का पश्चिमोत्तर प्रवाह भी प्रभाव डाल सकता है। दोनों धाराओं के मिलने या परस्पर प्रभाव से वर्षा होती है, हालांकि मात्रा और समय में क्षेत्रीय अंतर रहता है।
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कौन-सी शाखा पश्चिमी तट पर भारी वर्षा और दक्कन के पठार के कुछ भागों में वर्षाछाया की स्थिति से विशेष रूप से जुड़ी है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा कराती है। घाट पार करने के बाद वायु की नमी घटने से दक्कन के पठार के कुछ भाग अपेक्षाकृत शुष्क रहते हैं। इसीलिए पश्चिमी तट और आंतरिक पठारी भागों में वर्षा का स्पष्ट अंतर मिलता है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती है और पश्चिमी ढाल पर भारी ओरोग्राफिक वर्षा कराती है। मौसिनराम की अत्यधिक वर्षा मुख्यतः बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पवनों और खासी पहाड़ियों की स्थलाकृति से जुड़ी है। थार मरुस्थल में वर्षा कम होती है।
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कथन 1: अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा कराती है। कथन 2: पश्चिमी घाट पार करने के बाद वायु में नमी सामान्यतः बढ़ जाती है। सही विकल्प चुनिए।
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पहला कथन सही है क्योंकि नम वायु पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती है और वर्षा करती है। दूसरा कथन गलत है: वर्षा के दौरान वायु नमी खो देती है, और घाट के पूर्वी ओर उतरते समय गर्म होकर अधिक शुष्क हो सकती है।
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निम्न में से कौन-सा क्षेत्र बंगाल की खाड़ी शाखा से मिलने वाली प्रचुर मानसूनी नमी के लिए प्रसिद्ध है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वोत्तर भारत तक नमी पहुँचाती है। असम की ब्रह्मपुत्र घाटी और मेघालय की पहाड़ियों में वर्षा उल्लेखनीय होती है। इसके विपरीत लद्दाख, थार और कच्छ के कई भाग शुष्क जलवायु के लिए जाने जाते हैं।
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अरब सागर शाखा के नर्मदा-तापी मार्ग का भारत की वर्षा में क्या महत्व है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
नर्मदा और तापी घाटियाँ अरब सागर तट से मध्य भारत की ओर अपेक्षाकृत अनुकूल मार्ग प्रदान करती हैं। इस धारा से मध्य भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा होती है और आगे यह गंगा के मैदानों में अन्य मानसूनी प्रवाहों से मिल सकती है।
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किस कारण से बंगाल की खाड़ी शाखा का एक भाग बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में दक्षिण-पूर्वी दिशा से प्रवेश कर सकता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
म्यांमार के तटीय अराकान पर्वत बंगाल की खाड़ी से आने वाली पवनों को विक्षेपित करते हैं। इस कारण पवनों का एक बड़ा भाग भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मुड़ता है और पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश में दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा से पहुँच सकता है।