भारतीय मानसून
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कोपेन, हान्न और एंगॉट ने मानसून की तुलना किस प्रक्रिया के बड़े रूप से की?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
इन विद्वानों ने मानसून को बड़े पैमाने पर स्थल और समुद्र के तापांतर से बनने वाली समीरों जैसा माना। दैनिक समीर में दिशा दिन-रात से बदलती है, जबकि मानसून में दिशा का बदलाव मौसमी पैमाने पर होता है।
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तापीय संकल्पना की मुख्य सीमा क्या मानी जाती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
हैली का सिद्धांत स्थल और समुद्र के तापांतर की भूमिका समझाता है, लेकिन ITCZ, जेट धाराओं, मानसून विराम और वर्षा के क्षेत्रीय अंतर की पूरी व्याख्या नहीं करता। इसलिए आधुनिक व्याख्या में अनेक परस्पर जुड़े कारक शामिल किए जाते हैं।
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अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाएँ किस व्यापक प्रणाली का भाग हैं?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून मुख्यतः अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की दो शाखाओं के रूप में आगे बढ़ता है। दोनों शाखाएँ समुद्र से नमी लाती हैं, लेकिन स्थलाकृति और प्रवाह दिशा के कारण वर्षा का वितरण अलग-अलग होता है।
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पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा का प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
अरब सागर से आने वाली नम हवाएँ पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती हैं। ऊपर उठने पर हवा ठंडी होती है, जलवाष्प संघनित होता है और पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा होती है; पूर्वी ओर वर्षाछाया बन सकती है।
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मानसून का ‘प्रस्फोट’ या burst किसे कहते हैं?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
मानसून प्रस्फोट में आगमन के आसपास वर्षा और पवन की गतिविधि अपेक्षाकृत अचानक तेज होती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून का केरल तट पर सामान्य आगमन लगभग जून की शुरुआत में माना जाता है, पर तारीख साल-दर-साल बदल सकती है।
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मानसून गर्त की स्थिति बदलने से किस पर असर पड़ता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
मानसून गर्त उत्तर भारत के मैदानों के आसपास विकसित निम्न-दाब की लंबी पट्टी है। इसका उत्तर-दक्षिण खिसकाव वर्षा के क्षेत्र को बदल सकता है; गर्त के पास सक्रियता बढ़ने पर कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा और अन्य क्षेत्रों में विराम हो सकता है।
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सही युग्म चुनिए।
Options:
Correct Option: D
Explanation:
हैली ने 1686 में तापीय संकल्पना प्रस्तुत की, जिसमें स्थल-समुद्र तापांतर से बनने वाले दाब-अंतर को मानसून का कारण माना गया। फ्लोन ITCZ से संबंधित विचारों और कोटेश्वरम तिब्बत पठार तथा जेट धाराओं की भूमिका के लिए जाने जाते हैं।
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मानसून सिद्धांतों के संदर्भ में सही युग्म पहचानिए।
Options:
Correct Option: D
Explanation:
फ्लोन ने मानसून को ITCZ के मौसमी विस्थापन और भूमध्यरेखीय पछुआ पवनों से जोड़ा। उनके अनुसार ITCZ के उत्तर की ओर बढ़ने से पवन प्रणालियों में बदलाव आता है और दक्षिण एशिया का मानसून व्यापक परिसंचरण का हिस्सा बनता है।
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कथन 1: ITCZ ऋतु के साथ उत्तर-दक्षिण खिसकता है। कथन 2: इसका खिसकना मानसून को प्रभावित कर सकता है।
Options:
Correct Option: C
Explanation:
दोनों कथन सही हैं। ITCZ सूर्य की आभासी गति और मौसमी ताप वितरण के साथ खिसकता है। ग्रीष्म में इसके उत्तर की ओर जाने से दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा पार करके भारत की ओर आ सकती हैं और मानसूनी परिसंचरण को बल मिलता है।
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कथन 1: जेट धाराएँ धरातलीय मौसम को प्रभावित कर सकती हैं। कथन 2: जेट धाराएँ केवल समुद्र की सतह पर बहती हैं।
Options:
Correct Option: B
Explanation:
कथन 1 सही है क्योंकि जेट धाराएँ बड़े पैमाने के परिसंचरण, पश्चिमी विक्षोभ और मानसून को प्रभावित करती हैं। कथन 2 गलत है; जेट धाराएँ समुद्र की सतह पर नहीं, ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से बहने वाली पवन पट्टियाँ हैं।
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मानसून की आधुनिक व्याख्या में अनेक कारक क्यों शामिल किए जाते हैं?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मानसून एक जटिल जलवायु प्रणाली है। तापांतर सतही दाब को प्रभावित करता है, ITCZ और व्यापारिक पवनें निचले स्तर का प्रवाह बनाती हैं, जेट धाराएँ ऊपरी वायु प्रवाह बदलती हैं और पर्वत वर्षा के स्थानिक वितरण को प्रभावित करते हैं।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए नमी का मुख्य स्रोत क्या है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ हिंद महासागर और आसपास के गर्म समुद्री क्षेत्रों से गुजरते हुए जलवाष्प ग्रहण करती हैं। भारत में पहुँचकर जब नम हवा ऊपर उठती और ठंडी होती है, तो संघनन से वर्षा होती है।
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शीतकाल में उत्तर-पश्चिम भारत में उच्च दाब बनने का मुख्य कारण क्या है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
शीतकाल में विशाल एशियाई स्थलखंड तेजी से ठंडा होकर उच्च दाब विकसित करता है। हवाएँ उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती हैं और स्थल से समुद्र की ओर जाने के कारण अधिकांश उत्तर-पूर्वी हवाएँ शुष्क रहती हैं।
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तिब्बत पठार की भूमिका पर विशेष बल देने वाले भारतीय मौसम वैज्ञानिक कौन थे?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
पी. कोटेश्वरम ने तिब्बत पठार के ग्रीष्मकालीन ताप और जेट धाराओं की भूमिका पर बल दिया। पठार आसपास के मैदानों से अधिक सूर्यातप प्राप्त कर ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर सकता है।
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जेट स्ट्रीम सिद्धांत में मानसून के साथ जुड़ी ऊपरी वायु धारा कौन-सी है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
ग्रीष्मकाल में भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट का विकास मानसून के साथ जुड़ा है। तिब्बत पठार का ताप और ऊपरी वायुमंडल की तापीय संरचना इसके विकास को प्रभावित करते हैं।
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मानसून की दिशा में मौसमी परिवर्तन का सही वर्णन कौन-सा है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मानसून की मुख्य विशेषता पवन दिशा का मौसमी उत्क्रमण है। ग्रीष्म में दक्षिण-पश्चिम मानसून समुद्र से स्थल की ओर नमी लाता है; शीत में सामान्य प्रवाह स्थल से समुद्र की ओर हो जाता है, हालांकि बंगाल की खाड़ी से नमी लेने वाली हवाएँ तमिलनाडु में वर्षा करा सकती हैं।
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भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की सामान्य शुरुआत किस तट से मानी जाती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य आगमन केरल तट पर लगभग 1 जून के आसपास माना जाता है। इसके बाद यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाओं में आगे बढ़ता है; वास्तविक तारीख हर वर्ष बदल सकती है।
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‘मानसून सीमा’ या Monsoon Front किसे कहते हैं?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
GeoGyan लेख में मानसून सीमा को उस सीमा के रूप में समझाया गया है जहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनों से मिलती हैं। अभिसरण के कारण हवा ऊपर उठ सकती है और बादल-वर्षा विकसित हो सकती है।
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मानसून की क्षेत्रीय वर्षा-विविधता पर कौन-सा भौगोलिक कारक सीधा प्रभाव डालता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
स्थलाकृति मानसूनी वर्षा के वितरण को बहुत प्रभावित करती है। पश्चिमी घाट की पवनाभिमुख ढाल पर अधिक वर्षा और पूर्वी ओर वर्षाछाया मिल सकती है; हिमालय भी नम हवाओं के मार्ग और उत्तर भारत की वर्षा प्रणालियों को प्रभावित करता है।
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तापीय संकल्पना का मूल आधार क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
तापीय संकल्पना में स्थल और समुद्र के गर्म तथा ठंडा होने की अलग-अलग दरों से दाब-अंतर उत्पन्न होता है। वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है; आधुनिक व्याख्या इस आधार के साथ ITCZ, जेट धाराओं और स्थलाकृति को भी शामिल करती है।