भारत का उत्तरी मैदान
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पंजाब-हरियाणा मैदान का निर्माण मुख्यतः किन नदियों के निक्षेपों से हुआ है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पंजाब-हरियाणा मैदान एक निक्षेपात्मक अर्थात अधिवृद्धिकृत मैदान है। इसका निर्माण मुख्यतः सतलुज, ब्यास और रावी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के जमाव से हुआ। नदियाँ हिमालय से अपरदित पदार्थ मैदान में लाकर जमा करती हैं, जिससे विस्तृत समतल और कृषि के लिए उपयोगी भूमि विकसित होती है।
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पंजाब-हरियाणा मैदान का अनुमानित क्षेत्रफल कितना है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
लेख पंजाब-हरियाणा मैदान का क्षेत्रफल लगभग 1.75 लाख वर्ग किलोमीटर बताता है। यह विस्तृत मैदान उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम लगभग 640 किमी और पश्चिम से पूर्व लगभग 300 किमी तक फैला है। इसकी जलोढ़ मिट्टी, बारहमासी नदियों तथा सिंचाई सुविधाओं ने इसे कृषि की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाया है।
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पंजाब-हरियाणा मैदान को गंगा मैदान से अलग करने वाली प्रमुख स्थलाकृति कौन-सी है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
दिल्ली कटक पंजाब-हरियाणा मैदान और गंगा मैदान के बीच भौगोलिक विभाजक का काम करता है। मैदानों के बीच ऐसे निम्न ऊँचाई वाले स्थलरूप जल-निकास और क्षेत्रीय सीमाओं को समझने में मदद करते हैं। यह हिमालयी पर्वत-श्रेणी नहीं, बल्कि एक कटकनुमा भू-आकृति है।
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पंजाब-हरियाणा मैदान में लगभग 3 मीटर या उससे अधिक ऊँचे नदी कगार स्थानीय रूप से किस नाम से जाने जाते हैं?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पंजाब-हरियाणा मैदान में नदी कगार, जिन्हें अंग्रेज़ी में bluffs कहा जाता है, स्थानीय रूप से धाया कहलाते हैं। लेख के अनुसार इनकी ऊँचाई लगभग 3 मीटर या उससे अधिक हो सकती है। इसके विपरीत खादर की पट्टियों को बेत कहा जाता है। ये स्थानीय शब्द क्षेत्रीय स्थलाकृतियों की पहचान के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
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पंजाब-हरियाणा मैदान में खादर पट्टियों को किस स्थानीय नाम से जाना जाता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
खादर नदी के निकट की नई जलोढ़ भूमि होती है, जहाँ बाढ़ के समय ताजा अवसाद जमा हो सकते हैं। पंजाब-हरियाणा मैदान में इन खादर पट्टियों को बेत कहा जाता है। नदी कगारों के लिए धाया शब्द प्रयुक्त होता है। इन स्थानीय शब्दों को याद रखना क्षेत्रीय भूगोल और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
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शिवालिक के दक्षिण में पंजाब-हरियाणा क्षेत्र की छोटी मौसमी धाराओं को क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
शिवालिक के दक्षिण में लहरदार स्थलाकृतियों का अपरदन छोटी धाराओं द्वारा होता है, जिन्हें स्थानीय रूप से चोस कहा जाता है। ये धाराएँ वर्षा के समय सक्रिय होकर अपने साथ मिट्टी और मलबा बहा सकती हैं। इस कारण स्थानीय भू-आकृति, जल-निकास और भूमि उपयोग पर इनका प्रभाव पड़ता है।
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सतलुज और यमुना के बीच बहने वाली मौसमी नदी, जिसे प्राचीन सरस्वती से भी जोड़ा जाता है, कौन-सी है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
घग्गर नदी सतलुज और यमुना के बीच के क्षेत्र में बहने वाली मौसमी नदी है। लेख इसे प्राचीन सरस्वती से संबंधित परंपरा के साथ उल्लेखित करता है। इसमें मुख्यतः वर्षा ऋतु में जल रहता है, इसलिए इसका प्रवाह बारहमासी हिमालयी नदियों जैसा नहीं है। नदी के ऐतिहासिक और वर्तमान प्रवाह को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
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दो नदियों के बीच स्थित भू-भाग को भूगोल में क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
दोआब शब्द का अर्थ दो नदियों के बीच स्थित भूमि से है। पंजाब-हरियाणा और उससे सटे पंजाब क्षेत्र में कई दोआबों के नाम नदियों के आधार पर रखे गए हैं। नदी-घाटियों के बीच की यह भूमि अक्सर जलोढ़ निक्षेपों से बनी होती है और कृषि, बस्तियों तथा सिंचाई के लिए महत्त्वपूर्ण होती है।
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ब्यास और रावी नदियों के बीच स्थित दोआब कौन-सा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
ब्यास और रावी नदियों के बीच स्थित क्षेत्र बारी दोआब कहलाता है। दोआबों की पहचान संबंधित नदियों के नाम और उनके बीच की स्थिति से की जाती है। इसी क्रम में ब्यास-सतलुज के बीच बिस्त-जालंधर, रावी-चिनाब के बीच रचना तथा चिनाब-झेलम के बीच चाज दोआब स्थित है।
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ब्यास और सतलुज नदियों के बीच स्थित दोआब का नाम क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
ब्यास और सतलुज के बीच स्थित दोआब को बिस्त-जालंधर दोआब कहा जाता है। दोआबों के नामों में नदी-नामों के अंश मिलते हैं, इसलिए नदियों की भौगोलिक स्थिति जानना इन्हें याद रखने में सहायक होता है। यह प्रश्न पंजाब क्षेत्र की पारंपरिक भौगोलिक उप-इकाइयों से संबंधित है।
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गंगा मैदान पश्चिम में किस नदी से शुरू होकर पूर्व में बांग्लादेश की सीमा तक विस्तृत बताया गया है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
लेख में गंगा मैदान का विस्तार पश्चिम में यमुना नदी से लेकर पूर्व में बांग्लादेश की सीमा तक बताया गया है। यह लगभग 3.75 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला विशाल मैदान है। इसमें ऊपरी, मध्य और निचले गंगा मैदान जैसे उप-विभाग शामिल हैं, जिनमें स्थलाकृति, वर्षा और नदी-प्रणाली में क्षेत्रीय अंतर मिलते हैं।
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गंगा मैदान की अनुमानित लंबाई और औसत चौड़ाई क्या दी गई है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
गंगा मैदान की लंबाई लगभग 1,400 किलोमीटर और औसत चौड़ाई लगभग 300 किलोमीटर बताई गई है। इसका सामान्य ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है। इतने बड़े क्षेत्र में गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा जमा जलोढ़ पदार्थों ने विस्तृत, उपजाऊ तथा घनी आबादी वाला मैदान बनाया है।
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गंगा मैदान का सामान्य ढाल किस दिशा में है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
गंगा मैदान का सामान्य ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है। इसका अर्थ है कि व्यापक रूप से भूमि की ऊँचाई पश्चिमोत्तर भाग से पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी भागों की ओर घटती है। यह ढाल नदियों के प्रवाह, अवसादों के निक्षेपण और निचले भागों में बाढ़ तथा डेल्टा निर्माण को प्रभावित करती है।
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गंगा मैदान में समुद्र तल से सर्वाधिक ऊँचाई किस स्थान पर बताई गई है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
लेख में गंगा मैदान की सर्वाधिक ऊँचाई सहारनपुर में लगभग 276 मीटर और न्यूनतम ऊँचाई सागर द्वीप में लगभग 3 मीटर बताई गई है। यह ऊँचाई का अंतर मैदान के सामान्य ढाल को दर्शाता है। पूर्व की ओर नीचे जाते हुए नदी-प्रणाली अधिक विस्तृत होती है और अंततः बंगाल की खाड़ी के निकट डेल्टा क्षेत्र बनता है।
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ऊपरी गंगा मैदान में निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र शामिल है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
ऊपरी गंगा मैदान में गंगा-यमुना दोआब, रोहिलखंड मंडल और आगरा मंडल का कुछ भाग शामिल है। यह क्षेत्र उत्तर भारत के उपजाऊ कृषि क्षेत्रों में गिना जाता है। गंगा, यमुना, काली, शारदा, रामगंगा, घाघरा और राप्ती जैसी नदियाँ इसकी जल-निकास व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
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ऊपरी गंगा मैदान की दक्षिणी सीमा लेख में किस समोच्च रेखा से निर्धारित बताई गई है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
लेख के अनुसार ऊपरी गंगा मैदान की दक्षिणी सीमा 125 मीटर समोच्च रेखा से निर्धारित की गई है। समोच्च रेखाएँ समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़ती हैं और क्षेत्रीय भू-आकृति की सीमाएँ समझने में मदद करती हैं। लेख में इसकी पूर्वी सीमा को 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा से भी जोड़ा गया है।
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ऊपरी गंगा मैदान में लहरदार रेत के टीलों को किस नाम से जाना जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
ऊपरी गंगा मैदान में लहरदार रेत के टीलों को भूड़ कहा जाता है। ये स्थानीय स्थलरूप मैदान की सतह में विविधता उत्पन्न करते हैं। यद्यपि गंगा मैदान का बड़ा भाग समतल और जलोढ़ है, फिर भी भूड़ जैसे स्थलरूप स्थानीय मिट्टी, जल-निकास और भूमि उपयोग में अंतर पैदा कर सकते हैं।
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मध्य गंगा मैदान में प्रमुख बाईं ओर की सहायक नदियों का सही समूह कौन-सा है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मध्य गंगा मैदान में गंडक और कोसी गंगा की प्रमुख बाईं ओर की सहायक नदियाँ हैं, जबकि सोन प्रमुख दाईं ओर की सहायक नदी है। नदी के दाएँ या बाएँ तट का निर्धारण नीचे की ओर प्रवाह की दिशा में मुख करके किया जाता है। बिहार के मैदान में इन नदियों के निक्षेप, बाढ़ और मार्ग-परिवर्तन विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
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मध्य गंगा मैदान में थोड़े अवरोध के कारण नदियाँ बार-बार मार्ग क्यों बदल सकती हैं?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
मध्य गंगा मैदान का ढाल बहुत कम है, इसलिए नदी की ऊर्जा और प्रवाह दिशा में छोटे बदलाव भी उसके मार्ग को प्रभावित कर सकते हैं। बाढ़ के दौरान जमा अवसाद, तटों का कटाव और नदी-पात्र में निक्षेपण प्रवाह को बदल सकते हैं। इसी कारण इस क्षेत्र में बाढ़-मैदान, गोखुर झीलें और दलदली क्षेत्र विकसित होते हैं।
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मध्य गंगा मैदान की दलदली भूमि के लिए लेख में कौन-सा शब्द दिया गया है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
मध्य गंगा मैदान में चौर दलदली भूमि के लिए प्रयुक्त शब्द है। कम ढाल और जल निकासी की धीमी गति के कारण कुछ स्थानों पर पानी लंबे समय तक ठहर सकता है। इससे दलदली क्षेत्र, ताल और अन्य आर्द्रभूमियाँ बनती हैं। ये भू-आकृतियाँ कृषि, जैव-विविधता और स्थानीय बाढ़-व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।