भारत का उत्तरी मैदान
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निचले गंगा मैदान के दक्षिण-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र में कौन-सी नदियाँ प्रमुख बताई गई हैं?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
निचले गंगा मैदान के दक्षिण-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र में कसाई और सुवर्णरेखा नदियाँ प्रमुख हैं। इस मैदान की नदी-प्रणाली में पूर्व और पश्चिम की ओर अलग-अलग सहायक नदियाँ मिलती हैं। इसका सामान्य ढाल दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व की ओर है और दक्षिण में यह बंगाल की खाड़ी के निकट डेल्टा एवं तटीय मैदानों से जुड़ता है।
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निचले गंगा मैदान में सुंदरवन डेल्टा का निर्माण मुख्यतः किन नदियों के निक्षेपों से जुड़ा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
सुंदरवन डेल्टा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी-तंत्र द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेप से जुड़ा है। नदियाँ मैदानों से मिट्टी और अन्य पदार्थ बहाकर समुद्र के निकट जमा करती हैं, जिससे डेल्टा विकसित होता है। सुंदरवन में ज्वारीय जल, दलदली भूमि और मैंग्रोव वनस्पति का व्यापक विस्तार मिलता है।
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छोटानागपुर पठार के पूर्व में स्थित निचले गंगा मैदान के भाग को क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
राढ़ मैदान निचले गंगा मैदान का वह भाग है जो छोटानागपुर पठार के पूर्व में स्थित है। लेख के अनुसार इस क्षेत्र में दामोदर और सुवर्णरेखा नदियाँ बहती हैं। यहाँ मिट्टी का अपरदन एक प्रमुख समस्या है तथा चावल, मक्का और दलहन जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
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सुंदरवन नाम किस प्रकार की वनस्पति से जुड़ा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
सुंदरवन का नाम सुंदरी नामक मैंग्रोव वृक्षों से जुड़ा है। यह गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा के पूर्वी भाग में फैला दलदली वन क्षेत्र है। मैंग्रोव पौधे खारे या खारे-मीठे ज्वारीय जल और दलदली मिट्टी के अनुकूल होते हैं। यह क्षेत्र जैव-विविधता, तटीय सुरक्षा तथा बाघ और मगरमच्छ जैसे जीवों के लिए प्रसिद्ध है।
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ब्रह्मपुत्र मैदान की पश्चिम से पूर्व तक की लंबाई लगभग कितनी बताई गई है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
ब्रह्मपुत्र मैदान धुबरी से सदिया तक लगभग 800 किलोमीटर लंबा और करीब 80 किलोमीटर चौड़ा बताया गया है। यह उत्तरी मैदान का पूर्वी हिस्सा है और असम में विस्तृत नदी घाटी बनाता है। चारों ओर पर्वतों से घिरा होने तथा कम ढाल के कारण यहाँ नदी-निक्षेप, बाढ़-मैदान और अनेक नदी द्वीप विकसित हुए हैं।
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ब्रह्मपुत्र मैदान का अनुमानित क्षेत्रफल कितना है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
लेख में ब्रह्मपुत्र मैदान का क्षेत्रफल लगभग 56,275 वर्ग किलोमीटर दिया गया है। यह गंगा मैदान की तुलना में छोटा है, लेकिन इसकी विशिष्ट नदी-प्रणाली और बाढ़-मैदान इसे भौगोलिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। ब्रह्मपुत्र के साथ आने वाले भारी अवसाद और कम ढाल के कारण नदी की धाराएँ कई शाखाओं में बँट सकती हैं।
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ब्रह्मपुत्र मैदान में नदी का बहु-धाराओं में बँटकर बहना किस विशेषता को दर्शाता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
ब्रह्मपुत्र मैदान में कम ढाल और बड़ी मात्रा में अवसाद के कारण नदी कई धाराओं में विभाजित होकर बहती है। इस प्रकार की नदी को गुथी हुई या braided river कहा जाता है। धाराओं के बीच रेत और अवसाद के टापू बन सकते हैं तथा बाढ़ के दौरान नदी की धाराएँ अपना स्थान बदल सकती हैं।
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माजुली द्वीप किस नदी के मैदान में स्थित है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
माजुली द्वीप असम में ब्रह्मपुत्र नदी के भीतर स्थित प्रसिद्ध नदी द्वीप है। लेख इसे भारत का सबसे बड़ा नदी द्वीप बताता है और इसका क्षेत्रफल लगभग 930 वर्ग किलोमीटर देता है। नदी द्वीपों का निर्माण अवसादों के जमाव और नदी की शाखाओं के बीच भूमि के अलग-थलग पड़ने से होता है।
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ब्रह्मपुत्र मैदान की प्रमुख फसलें कौन-सी बताई गई हैं?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
ब्रह्मपुत्र मैदान के उपजाऊ जलोढ़ क्षेत्रों में चावल और पटसन प्रमुख फसलें हैं। पर्याप्त वर्षा, जल की उपलब्धता और जलोढ़ मिट्टी इन फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं। पटसन को गर्म और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है, जबकि चावल की खेती भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता वाले क्षेत्रों में व्यापक है।
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ब्रह्मपुत्र मैदान की असम घाटी को ऊपरी और निचली घाटी में बाँटने के लिए किस देशांतर का उपयोग बताया गया है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
लेख के अनुसार असम घाटी का ऊपरी और निचला भागों में विभाजन 94° पूर्वी देशांतर के आधार पर किया जाता है। देशांतर रेखाएँ पूर्व-पश्चिम स्थिति बताने वाले काल्पनिक अर्धवृत्त हैं। किसी क्षेत्र का प्रादेशिक विभाजन करते समय देशांतर, ऊँचाई, नदी-प्रणाली या वर्षा जैसी भौगोलिक सीमाओं का उपयोग किया जा सकता है।
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ब्रह्मपुत्र मैदान में उत्तर की सहायक नदियों द्वारा बनने वाली प्रमुख निक्षेपात्मक आकृति कौन-सी है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
ब्रह्मपुत्र की उत्तरी सहायक नदियाँ पर्वतीय क्षेत्र से मैदान में उतरते समय अपनी गति खोती हैं और जलोढ़ पंख जैसी निक्षेपात्मक आकृतियाँ बना सकती हैं। इन पंखों में जमा अवसाद जल-निकास को प्रभावित कर सकते हैं और सहायक नदियों को विसर्प बनाते हुए मुख्य नदी के समानांतर बहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इससे तटबंध, बिल और गोखुर झीलें विकसित हो सकती हैं।