भारत का उत्तरी मैदान
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गंगा मैदान की अनुमानित लंबाई और औसत चौड़ाई क्या दी गई है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
गंगा मैदान की लंबाई लगभग 1,400 किलोमीटर और औसत चौड़ाई लगभग 300 किलोमीटर बताई गई है। इसका सामान्य ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है। इतने बड़े क्षेत्र में गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा जमा जलोढ़ पदार्थों ने विस्तृत, उपजाऊ तथा घनी आबादी वाला मैदान बनाया है।
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गंगा मैदान का सामान्य ढाल किस दिशा में है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
गंगा मैदान का सामान्य ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है। इसका अर्थ है कि व्यापक रूप से भूमि की ऊँचाई पश्चिमोत्तर भाग से पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी भागों की ओर घटती है। यह ढाल नदियों के प्रवाह, अवसादों के निक्षेपण और निचले भागों में बाढ़ तथा डेल्टा निर्माण को प्रभावित करती है।
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गंगा मैदान में समुद्र तल से सर्वाधिक ऊँचाई किस स्थान पर बताई गई है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
लेख में गंगा मैदान की सर्वाधिक ऊँचाई सहारनपुर में लगभग 276 मीटर और न्यूनतम ऊँचाई सागर द्वीप में लगभग 3 मीटर बताई गई है। यह ऊँचाई का अंतर मैदान के सामान्य ढाल को दर्शाता है। पूर्व की ओर नीचे जाते हुए नदी-प्रणाली अधिक विस्तृत होती है और अंततः बंगाल की खाड़ी के निकट डेल्टा क्षेत्र बनता है।
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ऊपरी गंगा मैदान में निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र शामिल है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
ऊपरी गंगा मैदान में गंगा-यमुना दोआब, रोहिलखंड मंडल और आगरा मंडल का कुछ भाग शामिल है। यह क्षेत्र उत्तर भारत के उपजाऊ कृषि क्षेत्रों में गिना जाता है। गंगा, यमुना, काली, शारदा, रामगंगा, घाघरा और राप्ती जैसी नदियाँ इसकी जल-निकास व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
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ऊपरी गंगा मैदान की दक्षिणी सीमा लेख में किस समोच्च रेखा से निर्धारित बताई गई है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
लेख के अनुसार ऊपरी गंगा मैदान की दक्षिणी सीमा 125 मीटर समोच्च रेखा से निर्धारित की गई है। समोच्च रेखाएँ समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़ती हैं और क्षेत्रीय भू-आकृति की सीमाएँ समझने में मदद करती हैं। लेख में इसकी पूर्वी सीमा को 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा से भी जोड़ा गया है।
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ऊपरी गंगा मैदान में लहरदार रेत के टीलों को किस नाम से जाना जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
ऊपरी गंगा मैदान में लहरदार रेत के टीलों को भूड़ कहा जाता है। ये स्थानीय स्थलरूप मैदान की सतह में विविधता उत्पन्न करते हैं। यद्यपि गंगा मैदान का बड़ा भाग समतल और जलोढ़ है, फिर भी भूड़ जैसे स्थलरूप स्थानीय मिट्टी, जल-निकास और भूमि उपयोग में अंतर पैदा कर सकते हैं।
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मध्य गंगा मैदान में प्रमुख बाईं ओर की सहायक नदियों का सही समूह कौन-सा है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मध्य गंगा मैदान में गंडक और कोसी गंगा की प्रमुख बाईं ओर की सहायक नदियाँ हैं, जबकि सोन प्रमुख दाईं ओर की सहायक नदी है। नदी के दाएँ या बाएँ तट का निर्धारण नीचे की ओर प्रवाह की दिशा में मुख करके किया जाता है। बिहार के मैदान में इन नदियों के निक्षेप, बाढ़ और मार्ग-परिवर्तन विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
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मध्य गंगा मैदान में थोड़े अवरोध के कारण नदियाँ बार-बार मार्ग क्यों बदल सकती हैं?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
मध्य गंगा मैदान का ढाल बहुत कम है, इसलिए नदी की ऊर्जा और प्रवाह दिशा में छोटे बदलाव भी उसके मार्ग को प्रभावित कर सकते हैं। बाढ़ के दौरान जमा अवसाद, तटों का कटाव और नदी-पात्र में निक्षेपण प्रवाह को बदल सकते हैं। इसी कारण इस क्षेत्र में बाढ़-मैदान, गोखुर झीलें और दलदली क्षेत्र विकसित होते हैं।
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मध्य गंगा मैदान की दलदली भूमि के लिए लेख में कौन-सा शब्द दिया गया है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
मध्य गंगा मैदान में चौर दलदली भूमि के लिए प्रयुक्त शब्द है। कम ढाल और जल निकासी की धीमी गति के कारण कुछ स्थानों पर पानी लंबे समय तक ठहर सकता है। इससे दलदली क्षेत्र, ताल और अन्य आर्द्रभूमियाँ बनती हैं। ये भू-आकृतियाँ कृषि, जैव-विविधता और स्थानीय बाढ़-व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
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निचले गंगा मैदान के दक्षिण-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र में कौन-सी नदियाँ प्रमुख बताई गई हैं?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
निचले गंगा मैदान के दक्षिण-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र में कसाई और सुवर्णरेखा नदियाँ प्रमुख हैं। इस मैदान की नदी-प्रणाली में पूर्व और पश्चिम की ओर अलग-अलग सहायक नदियाँ मिलती हैं। इसका सामान्य ढाल दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व की ओर है और दक्षिण में यह बंगाल की खाड़ी के निकट डेल्टा एवं तटीय मैदानों से जुड़ता है।
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निचले गंगा मैदान में सुंदरवन डेल्टा का निर्माण मुख्यतः किन नदियों के निक्षेपों से जुड़ा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
सुंदरवन डेल्टा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी-तंत्र द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेप से जुड़ा है। नदियाँ मैदानों से मिट्टी और अन्य पदार्थ बहाकर समुद्र के निकट जमा करती हैं, जिससे डेल्टा विकसित होता है। सुंदरवन में ज्वारीय जल, दलदली भूमि और मैंग्रोव वनस्पति का व्यापक विस्तार मिलता है।
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भारत के उत्तरी मैदान का निर्माण मुख्यतः किन नदी प्रणालियों के जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों ने अवसाद जमा करके उत्तरी मैदान का निर्माण किया।
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उत्तरी भारत का विशाल मैदान मुख्यतः किस दिशा में फैला है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
यह मैदान सिंधु क्षेत्र से गंगा मैदान होते हुए ब्रह्मपुत्र घाटी तक पश्चिम से पूर्व फैला है और इसकी लंबाई लगभग 3,200 किमी मानी जाती है।
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उत्तरी मैदान का सामान्य ढाल किस दिशा में है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
उत्तरी मैदान का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व है। गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियाँ अंततः बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हैं।
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शिवालिक के दक्षिण में कंकड़ और बजरी से बनी संकरी पट्टी क्या कहलाती है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
भाबर शिवालिक के दक्षिण में स्थित गिरिपदीय पट्टी है। हिमालय से उतरने वाली नदियाँ यहाँ कंकड़, बजरी और मोटे अवसाद जमा करती हैं।
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भाबर क्षेत्र में छोटी नदियाँ सतह से प्रायः गायब क्यों हो जाती हैं?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
भाबर के कंकड़-बजरी निक्षेप अत्यधिक पारगम्य हैं, इसलिए छोटी धाराओं का पानी भूमि में रिस जाता है।
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भाबर के दक्षिण में स्थित अधिक नम और दलदली पट्टी क्या कहलाती है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
तराई भाबर के दक्षिण में स्थित नम पट्टी है। भाबर में नीचे गया जल यहाँ फिर सतह पर आ सकता है, जिससे दलदली दशाएँ बनती हैं।
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भाबर मैदान की सामान्य चौड़ाई लगभग कितनी बताई जाती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
भाबर सामान्यतः लगभग 8–16 किमी चौड़ी संकरी पट्टी है, हालाँकि इसकी चौड़ाई स्थान के अनुसार बदलती है।
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तराई क्षेत्र की प्रमुख प्राकृतिक विशेषता क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
अधिक नमी और कमजोर जल-निकास के कारण तराई में दलदली भूमि तथा घनी वनस्पति विकसित होती है।
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पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बना अपेक्षाकृत ऊँचा मैदान क्या कहलाता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
बांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बना ऊँचा भाग है, जहाँ सामान्य बाढ़ का पानी प्रायः नहीं पहुँचता। इसमें कंकर मिल सकता है।