भारत का उत्तरी मैदान
-
जलवायु एवं स्थलाकृतिक विशेषताओं के आधार पर भारत के उत्तरी मैदान को सामान्यतः किन चार प्रमुख प्रादेशिक इकाइयों में बाँटा जाता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
उत्तरी मैदान का प्रादेशिक विभाजन जलवायु, स्थलाकृति और नदी-निक्षेपों की विशेषताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसके चार प्रमुख भाग राजस्थान मैदान, पंजाब-हरियाणा मैदान, गंगा मैदान तथा ब्रह्मपुत्र मैदान हैं। प्रत्येक भाग में वर्षा, जल-निकास, मिट्टी और नदी-निर्मित स्थलरूपों की अलग-अलग विशेषताएँ मिलती हैं।
-
राजस्थान मैदान की स्थिति अरावली पर्वत के किस ओर है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
राजस्थान मैदान अरावली पर्वत के पश्चिम में स्थित है। इसमें राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र तथा बागड़ जैसे भौगोलिक भाग शामिल हैं। अरावली के पश्चिम में वर्षा अपेक्षाकृत कम होने के कारण शुष्क जलवायु, रेत के टीले और आंतरिक अपवाह वाले क्षेत्र प्रमुख हैं।
-
राजस्थान मैदान का अनुमानित क्षेत्रफल कितना है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
राजस्थान मैदान का अनुमानित क्षेत्रफल लगभग 1,75,000 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। इसकी विशालता के बावजूद बड़े हिस्से में शुष्क जलवायु और मरुस्थलीय स्थलरूप पाए जाते हैं। तुलना के लिए लेख में ब्रह्मपुत्र मैदान का क्षेत्रफल लगभग 56,275 वर्ग किमी और निचले गंगा मैदान का क्षेत्रफल लगभग 80,970 वर्ग किमी दिया गया है।
-
राजस्थान मैदान का सामान्य ढाल किस दिशा में है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
राजस्थान मैदान का सामान्य ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बताया गया है। मैदान की ऊँचाई और नदी-प्रवाह की दिशा समझने में सामान्य ढाल उपयोगी संकेत है। लूनी नदी का प्रवाह भी इस शुष्क क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और आंतरिक अपवाह के स्वरूप को समझने में महत्त्वपूर्ण है।
-
राजस्थान मैदान में लवणीय झीलों की उपस्थिति किस भौगोलिक प्रक्रिया का प्रमाण मानी गई है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
सांभर, डीडवाना, डेगाना और अन्य लवणीय झीलें राजस्थान के भूगर्भीय अतीत तथा शुष्क जलवायु से संबंधित हैं। लेख इन झीलों को समुद्र के पीछे हटने और पुराने समुद्री प्रभाव के प्रमाणों से जोड़ता है। शुष्क परिस्थितियों में जल का वाष्पीकरण अधिक होने से लवण जमा हो सकते हैं, जिससे झीलों का पानी खारा बनता है।
-
सांभर झील किस शहर के उत्तर-पश्चिम में लगभग 65 किमी दूर स्थित बताई गई है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
सांभर झील जयपुर के उत्तर-पश्चिम में लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह राजस्थान की प्रसिद्ध खारे पानी की झील है। वर्षा ऋतु में इसका फैलाव काफी बढ़ जाता है और इसका उल्लेख राजस्थान मैदान के लवणीय झीलों वाले भू-दृश्य को समझाने के लिए किया जाता है।
-
राजस्थान मैदान की कौन-सी नदी कच्छ के रण से होकर अरब सागर तक पहुँचती है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
लूनी राजस्थान के शुष्क मैदान की प्रमुख नदी है और लेख के अनुसार इस क्षेत्र की वह नदी है जो कच्छ के रण से होकर अरब सागर तक पहुँचती है। इसके ऊपरी भाग में पानी अपेक्षाकृत मीठा होता है, जबकि निचले भाग में लवणता बढ़ने से जल खारा हो जाता है। यह परिवर्तन शुष्क जलवायु और वाष्पीकरण से जुड़ा है।
-
राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भाग के उपजाऊ जलोढ़ मैदान को स्थानीय रूप से क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
राजस्थान मैदान के दक्षिण-पश्चिमी भाग में जलोढ़ मिट्टी वाले अपेक्षाकृत उपजाऊ मैदान मिलते हैं, जिन्हें रोही कहा जाता है। यह नाम स्थानीय भू-आकृतिक पहचान को दर्शाता है। इसके विपरीत राजस्थान के बड़े हिस्से में रेत के टीले, बरखान तथा प्लाया झीलों जैसे शुष्क प्रदेशों के स्थलरूप प्रमुख हैं।
-
घग्गर नदी के शुष्क नदी-पात्र से संबंधित मैदान को क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
राजस्थान मैदान के उत्तर-पूर्वी भाग में घग्गर नदी का शुष्क संस्तर या नदी-पात्र पाया जाता है, जिससे संबंधित क्षेत्र को घग्गर मैदान कहा जाता है। यह उदाहरण दिखाता है कि वर्तमान में मौसमी या शुष्क नदी-पात्र भी किसी क्षेत्र की स्थलाकृति और ऐतिहासिक जल-निकास व्यवस्था को पहचानने में उपयोगी होते हैं।
-
पंजाब-हरियाणा मैदान का निर्माण मुख्यतः किन नदियों के निक्षेपों से हुआ है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पंजाब-हरियाणा मैदान एक निक्षेपात्मक अर्थात अधिवृद्धिकृत मैदान है। इसका निर्माण मुख्यतः सतलुज, ब्यास और रावी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के जमाव से हुआ। नदियाँ हिमालय से अपरदित पदार्थ मैदान में लाकर जमा करती हैं, जिससे विस्तृत समतल और कृषि के लिए उपयोगी भूमि विकसित होती है।
-
पंजाब-हरियाणा मैदान का अनुमानित क्षेत्रफल कितना है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
लेख पंजाब-हरियाणा मैदान का क्षेत्रफल लगभग 1.75 लाख वर्ग किलोमीटर बताता है। यह विस्तृत मैदान उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम लगभग 640 किमी और पश्चिम से पूर्व लगभग 300 किमी तक फैला है। इसकी जलोढ़ मिट्टी, बारहमासी नदियों तथा सिंचाई सुविधाओं ने इसे कृषि की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाया है।
-
पंजाब-हरियाणा मैदान को गंगा मैदान से अलग करने वाली प्रमुख स्थलाकृति कौन-सी है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
दिल्ली कटक पंजाब-हरियाणा मैदान और गंगा मैदान के बीच भौगोलिक विभाजक का काम करता है। मैदानों के बीच ऐसे निम्न ऊँचाई वाले स्थलरूप जल-निकास और क्षेत्रीय सीमाओं को समझने में मदद करते हैं। यह हिमालयी पर्वत-श्रेणी नहीं, बल्कि एक कटकनुमा भू-आकृति है।
-
पंजाब-हरियाणा मैदान में लगभग 3 मीटर या उससे अधिक ऊँचे नदी कगार स्थानीय रूप से किस नाम से जाने जाते हैं?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
पंजाब-हरियाणा मैदान में नदी कगार, जिन्हें अंग्रेज़ी में bluffs कहा जाता है, स्थानीय रूप से धाया कहलाते हैं। लेख के अनुसार इनकी ऊँचाई लगभग 3 मीटर या उससे अधिक हो सकती है। इसके विपरीत खादर की पट्टियों को बेत कहा जाता है। ये स्थानीय शब्द क्षेत्रीय स्थलाकृतियों की पहचान के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
-
पंजाब-हरियाणा मैदान में खादर पट्टियों को किस स्थानीय नाम से जाना जाता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
खादर नदी के निकट की नई जलोढ़ भूमि होती है, जहाँ बाढ़ के समय ताजा अवसाद जमा हो सकते हैं। पंजाब-हरियाणा मैदान में इन खादर पट्टियों को बेत कहा जाता है। नदी कगारों के लिए धाया शब्द प्रयुक्त होता है। इन स्थानीय शब्दों को याद रखना क्षेत्रीय भूगोल और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
-
शिवालिक के दक्षिण में पंजाब-हरियाणा क्षेत्र की छोटी मौसमी धाराओं को क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
शिवालिक के दक्षिण में लहरदार स्थलाकृतियों का अपरदन छोटी धाराओं द्वारा होता है, जिन्हें स्थानीय रूप से चोस कहा जाता है। ये धाराएँ वर्षा के समय सक्रिय होकर अपने साथ मिट्टी और मलबा बहा सकती हैं। इस कारण स्थानीय भू-आकृति, जल-निकास और भूमि उपयोग पर इनका प्रभाव पड़ता है।
-
सतलुज और यमुना के बीच बहने वाली मौसमी नदी, जिसे प्राचीन सरस्वती से भी जोड़ा जाता है, कौन-सी है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
घग्गर नदी सतलुज और यमुना के बीच के क्षेत्र में बहने वाली मौसमी नदी है। लेख इसे प्राचीन सरस्वती से संबंधित परंपरा के साथ उल्लेखित करता है। इसमें मुख्यतः वर्षा ऋतु में जल रहता है, इसलिए इसका प्रवाह बारहमासी हिमालयी नदियों जैसा नहीं है। नदी के ऐतिहासिक और वर्तमान प्रवाह को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
-
दो नदियों के बीच स्थित भू-भाग को भूगोल में क्या कहा जाता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
दोआब शब्द का अर्थ दो नदियों के बीच स्थित भूमि से है। पंजाब-हरियाणा और उससे सटे पंजाब क्षेत्र में कई दोआबों के नाम नदियों के आधार पर रखे गए हैं। नदी-घाटियों के बीच की यह भूमि अक्सर जलोढ़ निक्षेपों से बनी होती है और कृषि, बस्तियों तथा सिंचाई के लिए महत्त्वपूर्ण होती है।
-
ब्यास और रावी नदियों के बीच स्थित दोआब कौन-सा है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
ब्यास और रावी नदियों के बीच स्थित क्षेत्र बारी दोआब कहलाता है। दोआबों की पहचान संबंधित नदियों के नाम और उनके बीच की स्थिति से की जाती है। इसी क्रम में ब्यास-सतलुज के बीच बिस्त-जालंधर, रावी-चिनाब के बीच रचना तथा चिनाब-झेलम के बीच चाज दोआब स्थित है।
-
ब्यास और सतलुज नदियों के बीच स्थित दोआब का नाम क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
ब्यास और सतलुज के बीच स्थित दोआब को बिस्त-जालंधर दोआब कहा जाता है। दोआबों के नामों में नदी-नामों के अंश मिलते हैं, इसलिए नदियों की भौगोलिक स्थिति जानना इन्हें याद रखने में सहायक होता है। यह प्रश्न पंजाब क्षेत्र की पारंपरिक भौगोलिक उप-इकाइयों से संबंधित है।
-
गंगा मैदान पश्चिम में किस नदी से शुरू होकर पूर्व में बांग्लादेश की सीमा तक विस्तृत बताया गया है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
लेख में गंगा मैदान का विस्तार पश्चिम में यमुना नदी से लेकर पूर्व में बांग्लादेश की सीमा तक बताया गया है। यह लगभग 3.75 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला विशाल मैदान है। इसमें ऊपरी, मध्य और निचले गंगा मैदान जैसे उप-विभाग शामिल हैं, जिनमें स्थलाकृति, वर्षा और नदी-प्रणाली में क्षेत्रीय अंतर मिलते हैं।