भारतीय जलवायु

  1. भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में कौन-सा शामिल है?

    Options:
    1. केवल जनसंख्या घनत्व
    2. केवल प्रशासनिक सीमाएँ
    3. केवल भाषा
    4. अक्षांशीय स्थिति

    Correct Option: D

    Explanation:

    अक्षांशीय स्थिति किसी स्थान पर प्राप्त सौर ऊर्जा और तापमान को प्रभावित करती है। भारत का उत्तर-दक्षिण विस्तार बड़ा है, इसलिए दक्षिणी और उत्तरी भागों में तापीय दशाओं में अंतर मिलता है। हालांकि जलवायु केवल अक्षांश से नहीं, बल्कि ऊँचाई, स्थलाकृति, समुद्र से दूरी और पवन प्रणालियों से भी प्रभावित होती है।

  2. कर्क रेखा का भारत की जलवायु पर क्या प्रभाव है?

    Options:
    1. यह पूरे भारत को शीत मरुस्थल बनाती है
    2. यह भारत की वर्षा को पूरी तरह रोकती है
    3. यह भारत में उष्ण और उपोष्ण जलवायु दशाओं के संक्रमण से जुड़ी है
    4. यह केवल समुद्री धाराओं को प्रभावित करती है

    Correct Option: C

    Explanation:

    कर्क रेखा भारत के लगभग मध्य भाग से गुजरती है। इसके दक्षिण का भाग उष्ण कटिबंधीय प्रभाव में रहता है, जबकि उत्तर के बड़े हिस्से में उपोष्ण दशाओं का प्रभाव भी दिखाई देता है। वास्तविक जलवायु पर अक्षांश के साथ ऊँचाई, समुद्र से दूरी और स्थलाकृति का भी असर पड़ता है।

  3. समुद्र से दूरी किसी क्षेत्र की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करती है?

    Options:
    1. समुद्र तटीय क्षेत्रों के तापमान को अपेक्षाकृत संतुलित करता है
    2. समुद्र हमेशा तापमान बढ़ाता ही है
    3. समुद्र का जलवायु से कोई संबंध नहीं
    4. समुद्र केवल हिमपात कराता है

    Correct Option: A

    Explanation:

    समुद्र धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है, इसलिए तटीय क्षेत्रों में तापमान का वार्षिक अंतर अपेक्षाकृत कम रहता है। समुद्र से दूर आंतरिक क्षेत्रों में स्थल जल्दी गर्म और ठंडा होता है, जिससे गर्मी और सर्दी अधिक तीव्र हो सकती है। इसे समुद्री और महाद्वीपीय प्रभाव के अंतर से समझते हैं।

  4. समुद्र से दूर स्थित आंतरिक क्षेत्रों की जलवायु में सामान्यतः कौन-सी विशेषता मिलती है?

    Options:
    1. तापमान का अपेक्षाकृत अधिक वार्षिक अंतर
    2. साल भर समान तापमान
    3. हर दिन भारी हिमपात
    4. पूरे वर्ष समुद्री समीर

    Correct Option: A

    Explanation:

    आंतरिक क्षेत्रों में समुद्र का ताप-संतुलन प्रभाव कम होता है। स्थल गर्मियों में जल्दी गर्म और सर्दियों में जल्दी ठंडा होता है, इसलिए तापमान का वार्षिक अंतर तटीय क्षेत्रों से अधिक रहता है। उत्तर-पश्चिमी भारत में यह महाद्वीपीय प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

  5. ऊँचाई बढ़ने पर तापमान सामान्यतः कैसा बदलता है?

    Options:
    1. बढ़ता ही जाता है
    2. घटता है
    3. अपरिवर्तित रहता है
    4. हमेशा शून्य हो जाता है

    Correct Option: B

    Explanation:

    क्षोभमंडल में सामान्यतः ऊँचाई बढ़ने के साथ वायु का तापमान घटता है। इसी कारण हिमालय के ऊँचे क्षेत्रों में मैदानों की तुलना में ठंड अधिक होती है और ऊँचाई के अनुसार हिमपात भी संभव है। स्थानीय मौसम, ढाल और वायु प्रवाह के कारण कुछ स्थितियों में अपवाद हो सकते हैं।

  6. हिमालय भारत की जलवायु को किस प्रमुख तरीके से प्रभावित करता है?

    Options:
    1. दक्षिण-पश्चिम मानसून को पूरी तरह समाप्त करता है
    2. मध्य एशिया की अत्यधिक ठंडी हवाओं के प्रवेश को सीमित करता है
    3. भारत को समुद्र से काट देता है
    4. केवल दक्षिण भारत में वर्षा कराता है

    Correct Option: B

    Explanation:

    हिमालय एक विशाल पर्वतीय अवरोध है, जो मध्य एशिया की अत्यधिक ठंडी वायु को भारतीय उपमहाद्वीप तक सीधे पहुँचने से रोकने में मदद करता है। यह मानसूनी पवनों के उत्तर की ओर प्रवाह को भी प्रभावित करता है और कई क्षेत्रों में वर्षा के वितरण में योगदान देता है।

  7. पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा का मुख्य कारण क्या है?

    Options:
    1. नम मानसूनी पवनों का पर्वत से टकराकर ऊपर उठना
    2. अरावली का समानांतर होना
    3. समुद्र से बहुत अधिक दूरी
    4. ठंडी महाद्वीपीय हवाओं का उतरना

    Correct Option: A

    Explanation:

    अरब सागर से आने वाली नम दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें पश्चिमी घाट से टकराकर ऊपर उठती हैं। ऊपर उठने पर वायु ठंडी होती है और जलवाष्प संघनित होकर वर्षा करती है। इसी ओरोग्राफिक प्रक्रिया के कारण पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल और निकटवर्ती तटीय मैदान अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं।

  8. पश्चिमी घाट के पूर्व में वर्षाछाया क्षेत्र बनने का प्रमुख कारण क्या है?

    Options:
    1. वायु का लगातार ऊपर उठना
    2. समुद्र का निकट होना
    3. पर्वत पार करने के बाद वायु का नीचे उतरकर गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क होना
    4. पवनों का उत्तर ध्रुव से आना

    Correct Option: C

    Explanation:

    पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर वर्षा के बाद वायु की नमी घट जाती है। पर्वत के दूसरी ओर नीचे उतरती वायु गर्म होती है और उसकी सापेक्ष आर्द्रता कम हो सकती है। इस कारण दक्कन के पठार के कुछ हिस्सों में पश्चिमी ढाल की तुलना में कम वर्षा होती है।

  9. अरावली पर्वतमाला पश्चिमी राजस्थान में अधिक वर्षा कराने में सीमित क्यों रहती है?

    Options:
    1. इसकी दिशा अरब सागर से आने वाली मानसूनी पवनों के लगभग समानांतर है
    2. यह समुद्र के नीचे स्थित है
    3. यह हिमालय से ऊँची है
    4. यह मानसूनी पवनों को पूरी तरह रोक देती है

    Correct Option: A

    Explanation:

    अरावली पर्वतमाला की सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है और यह अरब सागर शाखा के प्रवाह के लगभग समानांतर पड़ती है। इसलिए यह पवनों को बड़े पैमाने पर ऊपर उठाने वाला प्रभावी अवरोध नहीं बनती। समुद्र से दूरी और नमी की कमी भी पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा के कारण हैं।

  10. मेघालय में अत्यधिक वर्षा होने में कौन-सा स्थलाकृतिक कारक महत्वपूर्ण है?

    Options:
    1. थार मरुस्थल की निकटता
    2. अरावली का अवरोध
    3. हिमालय के उत्तर में स्थिति
    4. खासी पहाड़ियों द्वारा नम पवनों का ऊपर उठाया जाना

    Correct Option: D

    Explanation:

    बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पवनें मेघालय की खासी पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं। इससे वायु ठंडी होती है और भारी ओरोग्राफिक वर्षा होती है। मौसिनराम और चेरापूंजी क्षेत्र की अत्यधिक वर्षा में पवनों की नमी और स्थानीय स्थलाकृति दोनों का योगदान है।

  11. भारतीय मानसून के विकास में स्थल और समुद्र के असमान गर्म होने का क्या महत्व है?

    Options:
    1. यह पृथ्वी के घूर्णन को रोकता है
    2. इससे पर्वतों की ऊँचाई बदलती है
    3. यह मौसमी दाब-अंतर और पवनों के उलटाव में योगदान देता है
    4. इसका पवनों पर कोई प्रभाव नहीं

    Correct Option: C

    Explanation:

    गर्मियों में भारतीय स्थलभाग समुद्र की तुलना में अधिक तेजी से गर्म होता है और स्थल पर निम्न दाब विकसित हो सकता है। समुद्र और स्थल के बीच दाब-अंतर मानसूनी परिसंचरण को प्रभावित करता है। शीत ऋतु में तापीय दशाएँ बदलने से पवनों का सामान्य प्रवाह भी बदल जाता है।

  12. दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में नमी मुख्यतः कहाँ से प्राप्त करता है?

    Options:
    1. सहारा मरुस्थल से
    2. मध्य एशिया के शीत मरुस्थल से
    3. हिंद महासागर और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों से
    4. केवल हिमालयी हिमनदों से

    Correct Option: C

    Explanation:

    दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी सहित आसपास के समुद्री क्षेत्रों से नमी ग्रहण करती हैं। भारत में पहुँचकर ये पवनें वर्षा कराती हैं। पवनों का मार्ग, समुद्र पर बिताया गया समय और स्थलाकृति तय करते हैं कि किस क्षेत्र में कितनी वर्षा होगी।

  13. भारत की जलवायु पर ऊपरी वायुमंडलीय जेट धाराओं का प्रभाव किससे संबंधित है?

    Options:
    1. केवल समुद्र की लवणता से
    2. मानसून के आगमन और मौसमी परिसंचरण में बदलाव से
    3. मृदा के रंग से
    4. स्थानीय जनसंख्या घनत्व से

    Correct Option: B

    Explanation:

    जेट धाराएँ ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से बहने वाली वायु की संकरी पट्टियाँ हैं। इनके मौसमी स्थानांतरण का संबंध भारत में पश्चिमी विक्षोभों, मानसूनी परिसंचरण और मानसून के आगमन से जोड़ा जाता है। जेट धाराओं का प्रभाव अन्य वायुमंडलीय और महासागरीय परिस्थितियों के साथ मिलकर काम करता है।

  14. शीत ऋतु में उत्तर-पश्चिमी भारत में वर्षा कराने वाली मौसम प्रणालियाँ कौन-सी हैं?

    Options:
    1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा
    2. पश्चिमी विक्षोभ
    3. स्थानीय स्थल समीर
    4. केवल उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें

    Correct Option: B

    Explanation:

    पश्चिमी विक्षोभ पश्चिम से आने वाली मौसम प्रणालियाँ हैं, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र और पश्चिमी एशिया के आसपास विकसित होती हैं। सर्दियों में ये पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिमी भारत के अन्य हिस्सों में वर्षा तथा पश्चिमी हिमालय में हिमपात करा सकती हैं।

  15. पश्चिमी विक्षोभ भारत के किस मौसम में विशेष प्रभाव डालते हैं?

    Options:
    1. शीत ऋतु
    2. केवल मानसून के चरम समय में
    3. केवल ग्रीष्म के आरंभ में
    4. केवल वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद

    Correct Option: A

    Explanation:

    पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव उत्तर-पश्चिमी भारत में शीत ऋतु के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। इनके कारण मैदानी क्षेत्रों में वर्षा और हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात हो सकता है। यह वर्षा रबी फसलों के लिए उपयोगी होती है, हालांकि कभी-कभी ओलावृष्टि या तेज मौसम से नुकसान भी हो सकता है।

  16. उष्णकटिबंधीय चक्रवात भारत की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?

    Options:
    1. वे केवल हिमालय में हिमपात कराते हैं
    2. विशेषकर तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएँ और भारी वर्षा ला सकते हैं
    3. वे हमेशा सूखा पैदा करते हैं
    4. उनका तटीय मौसम पर कोई प्रभाव नहीं

    Correct Option: B

    Explanation:

    बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात भारत के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। वे तेज हवाएँ, भारी वर्षा, समुद्री तूफानी लहरें और बाढ़ जैसी स्थितियाँ पैदा कर सकते हैं। अक्टूबर-नवंबर में बंगाल की खाड़ी की प्रणालियाँ पूर्वी तट के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती हैं।

  17. एल नीनो का भारतीय मानसून पर संभावित प्रभाव क्या हो सकता है?

    Options:
    1. हर बार पूरे भारत में बाढ़ आती है
    2. इसका महासागरों से कोई संबंध नहीं
    3. यह केवल हिमालय की ऊँचाई बदलता है
    4. कुछ वर्षों में मानसूनी वर्षा कमजोर पड़ने की संभावना बढ़ सकती है

    Correct Option: D

    Explanation:

    एल नीनो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ा है। यह वैश्विक वायुदाब और पवन परिसंचरण को बदल सकता है तथा कई वर्षों में भारतीय मानसून को कमजोर करने की संभावना बढ़ा सकता है। प्रभाव हर घटना में समान नहीं होता।

  18. दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation) किससे संबंधित है?

    Options:
    1. केवल चंद्रमा की कलाओं से
    2. स्थल की ऊँचाई में दैनिक बदलाव से
    3. नदी के जलस्तर से
    4. उष्णकटिबंधीय प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के बीच वायुदाब में बदलाव के पैटर्न से

    Correct Option: D

    Explanation:

    दक्षिणी दोलन उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच वायुदाब के उतार-चढ़ाव से संबंधित है। यह एल नीनो-दक्षिणी दोलन प्रणाली का वायुमंडलीय पक्ष है। इसका संबंध व्यापारिक पवनों, महासागरीय दशाओं और भारतीय मानसून की परिवर्तनशीलता से हो सकता है।

  19. एल नीनो और दक्षिणी दोलन के संयुक्त संबंध को सामान्यतः किस नाम से जाना जाता है?

    Options:
    1. ENSO
    2. IOD
    3. ITCZ
    4. GDP

    Correct Option: A

    Explanation:

    ENSO का पूरा नाम El Niño–Southern Oscillation है। इसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान और वायुदाब परिसंचरण में परस्पर जुड़े बदलाव शामिल होते हैं। ENSO का प्रभाव विश्व के अनेक क्षेत्रों के मौसम पर पड़ता है और भारतीय मानसून की वर्षा में अंतर से भी इसका संबंध हो सकता है।

  20. भारत के जलवायु पर हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) का क्या प्रभाव हो सकता है?

    Options:
    1. यह केवल भूमि की ऊँचाई को प्रभावित करता है
    2. यह एक पर्वत श्रृंखला है
    3. इसका समुद्री तापमान से संबंध नहीं
    4. यह हिंद महासागर के अलग-अलग भागों में समुद्री सतह तापमान के अंतर के माध्यम से मानसून को प्रभावित कर सकता है

    Correct Option: D

    Explanation:

    हिंद महासागर द्विध्रुव हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी भागों के समुद्री सतह तापमान में अंतर से जुड़ा जलवायु पैटर्न है। इसका सकारात्मक या नकारात्मक चरण समुद्री परिसंचरण और नमी के वितरण को प्रभावित कर सकता है। यह ENSO के साथ मिलकर भारतीय मानसून के परिणामों को बदल सकता है।

Test Your Preparation!

Practice topic-wise MCQs with explanations to prepare for competitive exams and improve your concepts