चाय की तरह कहवा भी भारत की महत्वपूर्ण बागाती एवं वाणिज्यिक फसलों में से एक है। भारत में इसका उत्पादन मुख्यतः पश्चिमी घाट के पर्वतीय क्षेत्रों में केंद्रित है। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु इसके पारंपरिक उत्पादक राज्य हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी खेती का विस्तार हुआ है।
भारत में कहवा को प्रायः प्राकृतिक छायादार वृक्षों के नीचे उगाया जाता है। इससे पौधों को तेज धूप से सुरक्षा मिलती है और पर्वतीय पारिस्थितिकी का संरक्षण भी होता है।
कहवा उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ
कहवा मुख्यतः गर्म और आर्द्र जलवायु की फसल है। इसके लिए लगभग 16°C से 28°C तापमान उपयुक्त है। लगभग 150–250 सेमी वार्षिक वर्षा, सुवाहित भूमि, पर्याप्त आर्द्रता और हल्की ढाल वाली भूमि इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है। बहुत अधिक तेज धूप, पाला और लंबे समय तक रहने वाला शुष्क मौसम कहवा के पौधों के लिए प्रतिकूल हो सकता है।
कहवा की खेती के लिए गहरी, उपजाऊ, जैविक पदार्थों से समृद्ध तथा अच्छी जल-निकास वाली मिट्टी उपयुक्त होती है। पर्वतीय ढालें इसकी खेती के लिए इसलिए उपयोगी हैं क्योंकि यहाँ जल का निकास स्वाभाविक रूप से अच्छा रहता है। कहवा के बागानों में छायादार वृक्षों का विशेष महत्व है और कई क्षेत्रों में इसके साथ काली मिर्च, इलायची तथा अन्य फसलों को भी उगाया जाता है।
भारत में कहवा का वितरण
भारत में कहवा की खेती प्रमुख रूप से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के पश्चिमी घाट में की जाती है। वर्तमान में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु का संयुक्त उत्पादन लगभग 3.57 लाख टन रहा, जो भारत के कुल 3.73 लाख टन उत्पादन का लगभग 95.72% है।

राज्यवार कहवा उत्पादन एवं वितरण
कर्नाटक
कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा कहवा उत्पादक राज्य है। 2025-26 में कर्नाटक का अंतिम कहवा उत्पादन 2,56,695 टन रहा, जो भारत के कुल उत्पादन का लगभग 68.82% है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले चिक्कमगलुरु, कोडगु (कूर्ग) और हासन हैं। इनमें कोडगु का उत्पादन सबसे अधिक रहा।
कर्नाटक के बाबाबुदन गिरि, चिक्कमगलुरु और कूर्ग भारत के प्रसिद्ध कहवा क्षेत्र हैं। यहाँ पहाड़ी ढाल, पर्याप्त वर्षा, ऊँचाई और छायादार वृक्षों की उपलब्धता कहवा की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं।
केरल
केरल भारत का दूसरा प्रमुख कहवा उत्पादक राज्य है। नवीनतम 2025-26 आँकड़ों के अनुसार केरल का कहवा उत्पादन 80,350 टन रहा, जो भारत के कुल उत्पादन का लगभग 21.54% है। राज्य में वायनाड सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्र है। इसके अलावा त्रावणकोर और नेल्लियाम्पथीज भी प्रमुख कहवा क्षेत्र हैं।
तमिलनाडु
तमिलनाडु भारत का तीसरा प्रमुख कहवा उत्पादक राज्य है। 2025-26 में तमिलनाडु का उत्पादन 19,975 टन रहा, जो भारत के कुल उत्पादन का लगभग 5.35% है। इसमें पलनी (8,235 टन), नीलगिरि (6,335 टन), शेवरॉय (4,025 टन) और अनामलाई (1,380 टन) प्रमुख क्षेत्र
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश को भारत के गैर-पारंपरिक कहवा उत्पादक क्षेत्रों में रखा जाता है। इसका प्रमुख क्षेत्र अराकू घाटी है, जहाँ आदिवासी समुदायों द्वारा पहाड़ी एवं छायादार क्षेत्रों में कहवा की खेती की जाती है। 2025-26 में आंध्र प्रदेश का उत्पादन 15,290 टन रहा, जो भारत के कुल उत्पादन का लगभग 4.10% है। यह क्षेत्र विशेष रूप से Arabica कहवा के लिए जाना जाता
ओडिशा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र
ओडिशा तथा पूर्वोत्तर भारत में कहवा उत्पादन अभी प्रमुख राज्यों की तुलना में कम है, लेकिन ये उभरते हुए गैर-पारंपरिक क्षेत्र हैं। आंध्र प्रदेश के साथ पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड आदि में कहवा की खेती के विस्तार का उल्लेख मिलता है। 2025-26 में ओडिशा का उत्पादन 470 टन और पूर्वोत्तर क्षेत्र का लगभग 220 टन रहा।

नवीनतम राज्यवार कहवा उत्पादन
| रैंक | राज्य/क्षेत्र | उत्पादन (मीट्रिक टन में) | भारत में हिस्सा |
| 1 | कर्नाटक | 2,56,695 | 68.82% |
| 2 | केरल | 80,350 | 21.54% |
| 3 | तमिलनाडु | 19,975 | 5.35% |
| 4 | आंध्र प्रदेश | 15,290 | 4.10% |
| 5 | ओडिशा | 470 | 0.13% |
| 6 | पूर्वोत्तर क्षेत्र | 220 | 0.06% |
| भारत | 3,73,000 | 100% |
कहवा की प्रमुख किस्में
भारत में कहवा की दो प्रमुख व्यावसायिक किस्में अरेबिका (Arabica) और रोबस्टा (Robusta) हैं। अरेबिका अपेक्षाकृत ऊँचे क्षेत्रों में तथा रोबस्टा कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में अधिक उपयुक्त पाया जाता है। अरेबिका के लिए लगभग 750–1500 मीटर तथा रोबस्टा के लिए लगभग 300–610 मीटर की ऊँचाई का उल्लेख है।
वर्तमान उत्पादन में Robusta का प्रभुत्व है। 2025-26 अंतिम अनुमान के अनुसार भारत में 1,11,000 टन Arabica और 2,62,000 टन Robusta का उत्पादन हुआ। अर्थात कुल उत्पादन में Robusta की हिस्सेदारी लगभग 70.2% रही।
रोपण-विधि
कहवा की खेती सामान्यतः छायादार वृक्षों के बीच की जाती है। रोपण का उपयुक्त समय जनवरी से मार्च के बीच माना गया है और पौधों की उचित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्र में पौधों की निराई-गुड़ाई और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कहवा के फल पकने के बाद उन्हें तोड़कर प्रसंस्करण किया जाता है। उत्पादन प्रक्रिया में तुड़ाई, प्रसंस्करण, सुखाने और बीजों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्याप्त श्रम की आवश्यकता होती है।
भारत में कहवा उत्पादन की वृद्धि
1950-51 में लगभग 92.52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से 18.89 हजार टन उत्पादन हुआ था, जबकि = 2025-26 में भारत का अंतिम कहवा उत्पादन 3,73,000 टन रहा।
घरेलू उपभोग
भारत में उत्पादित कहवा का एक महत्वपूर्ण भाग घरेलू बाजार में खपत होता है और समय के साथ प्रति व्यक्ति कहवा खपत में वृद्धि हुई है। 2024 में भारत की घरेलू कॉफी खपत लगभग 96,000 टन थी। इससे भारतीय बाजार में कॉफी की बढ़ती मांग का संकेत मिलता है।
कहवा का निर्यात
कहवा भारत की निर्यातोन्मुख बागाती फसल है। इसे भारत की प्रमुख निर्यात फसलों में शामिल किया गया है तथा यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस आदि देशों को भारतीय कहवा के निर्यात का उल्लेख मिलता है।
वर्तमान में भारतीय कहवा की अंतरराष्ट्रीय मांग बनी हुई है। Coffee Board की 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 3,88,925 टन कॉफी का निर्यात किया, जिसका कुल मूल्य लगभग ₹15,422 करोड़ था। यह निर्यात 126 देशों को किया गया। प्रमुख बाजारों में इटली, जर्मनी, रूस, बेल्जियम और संयुक्त अरब अमीरात शामिल रहे।
कहवा का आर्थिक महत्व
कहवा उत्पादन मुख्यतः पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का महत्वपूर्ण साधन है। इसके साथ प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, पैकेजिंग और निर्यात जैसी गतिविधियाँ भी जुड़ी हुई हैं।
कहवा की छायादार कृषि प्रणाली का पर्यावरणीय महत्व भी है। पश्चिमी घाट जैसे जैव-विविधता वाले क्षेत्रों में पेड़ों के नीचे कहवा उगाने से कृषि और प्राकृतिक वनस्पति के बीच एक संतुलन बना रहता है।
कहवा उत्पादन की प्रमुख समस्याएँ
कहवा उत्पादन को जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, तापमान में परिवर्तन, कीट एवं रोग, श्रम लागत तथा अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादन होने के कारण परिवहन और प्रसंस्करण की लागत भी अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
भविष्य में छायादार कृषि, जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल किस्मों, वैज्ञानिक बागान प्रबंधन और उच्च गुणवत्ता वाले मूल्यवर्धित कहवा पर ध्यान देना भारतीय कहवा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण होगा।
Sources: CB
FAQs
Q.1 भारत में कहवा का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा कहवा उत्पादक राज्य है। 2025-26 में इसका उत्पादन 2,56,695 टन रहा।
Q.2 भारत में कहवा के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र कौन-से हैं?
कर्नाटक में चिक्कमगलुरु, कोडगु और हासन, केरल में वायनाड, तथा तमिलनाडु में पलनी, नीलगिरि, शेवरॉय और अनामलाई प्रमुख कहवा क्षेत्र हैं।
Q.3 भारत में कौन-सी कहवा किस्म अधिक उत्पादित होती है?
भारत में Robusta का उत्पादन अधिक है। 2025-26 में Robusta का उत्पादन 2,62,000 टन, जबकि Arabica का उत्पादन 1,11,000 टन रहा।
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