भारत में मृदा का वर्गीकरण
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जलोढ़ मिट्टी में ‘कछारी’ या ‘काँप’ नाम किस कारण प्रचलित है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
जलोढ़ मिट्टी नदियों द्वारा बहाकर लाई गई रेत, गाद और महीन अवसाद के निक्षेप से बनती है। इसी नदीय निक्षेप के कारण इसे कछारी या काँप की मिट्टी भी कहा जाता है। उत्तरी मैदानों और अनेक डेल्टा क्षेत्रों में इसका व्यापक विस्तार है।
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किस प्रकार की जलोढ़ मिट्टी में कंकरों की अधिकता मिलने की संभावना रहती है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
बांगर पुराने जलोढ़ निक्षेपों से बने अपेक्षाकृत ऊँचे भूभागों में मिलती है। इसमें कैल्शियम के कंकड़ या कंकर अधिक हो सकते हैं, जबकि खादर नई बाढ़ सामग्री से बनती है और नियमित रूप से नवीनीकृत होती रहती है।
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किस परिस्थिति में जलोढ़ मिट्टी में गहन कृषि करना अपेक्षाकृत आसान होता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
जलोढ़ मिट्टी के बड़े क्षेत्र समतल नदी मैदानों में स्थित हैं। मिट्टी अपेक्षाकृत मुलायम होने से कुएँ, नलकूप और नहरें बनाना आसान हो सकता है; इसलिए सिंचाई और गहन कृषि का विकास हुआ है।
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यदि किसी डेल्टा में मिट्टी के कण बहुत महीन हों और नमी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह किस प्रकार की जलोढ़ मिट्टी का संकेत हो सकता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
नदियों के डेल्टा में बहुत महीन अवसाद जमा होते हैं। ऐसे क्षेत्रों की मिट्टी नम और कभी-कभी दलदली होती है, और पोषक तत्त्वों की उपलब्धता तथा जल निकास के आधार पर इसकी कृषि उपयोगिता बदल सकती है।
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काली मिट्टी को ‘स्थायी’ या In Situ मिट्टी कहने का क्या अर्थ है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
In Situ मिट्टी का अर्थ है कि वह मुख्यतः उसी स्थान पर मूल चट्टान के अपक्षय से विकसित हुई है, न कि किसी नदी या हिमनद द्वारा दूर से लाकर जमा की गई है। काली मिट्टी का संबंध प्रायद्वीपीय भारत की बेसाल्टिक चट्टानों से जोड़ा जाता है।
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काली मिट्टी में फॉस्फोरस और नाइट्रोजन कम होने का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
काली मिट्टी में नमी धारण करने की क्षमता अच्छी होती है, परंतु कुछ आवश्यक पोषक तत्त्वों की कमी हो सकती है। इसलिए फसल की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरक का संतुलित प्रयोग उपज बनाए रखने में मदद करता है।
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एक किसान पहली बारिश के बाद काली मिट्टी की जुताई करने की सलाह क्यों मान सकता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
काली मिट्टी सूखने पर सिकुड़कर गहरी दरारें बना सकती है और गीली होने पर बहुत चिपचिपी हो जाती है। नमी की उपयुक्त अवस्था में जुताई करना इसलिए महत्त्वपूर्ण है, ताकि खेत तैयार करना आसान हो और मिट्टी की संरचना को अनावश्यक नुकसान न पहुँचे।
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काली मिट्टी के शुष्क कृषि के लिए उपयोगी होने का मुख्य कारण क्या है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
काली मिट्टी के महीन और चिकने कण जल धारण क्षमता बढ़ाते हैं। वर्षा के बाद मिट्टी में नमी लंबे समय तक उपलब्ध रह सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सीमित सिंचाई के साथ शुष्क कृषि संभव होती है।
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लाल मिट्टी और पीली मिट्टी के रंग में अंतर किससे जुड़ा है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
लाल और पीली मिट्टियों का रंग लौह यौगिकों से जुड़ा है। लौह के ऑक्सीकरण से लाल रंग उभर सकता है, जबकि जलयोजन की दशाओं में रंग पीला दिखाई दे सकता है। इसलिए रंग का अंतर मिट्टी की रासायनिक अवस्था से संबंधित है।
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प्रायद्वीपीय भारत में लाल और पीली मिट्टियाँ मुख्यतः किस प्रकार की चट्टानों के अपक्षय से बनती हैं?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
लाल और पीली मिट्टियाँ प्राचीन रवेदार तथा रूपांतरित चट्टानों के टूटने-फूटने और अपक्षय से बनती हैं। ये प्रायद्वीपीय पठार के कई हिस्सों में पाई जाती हैं और सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा जैव पदार्थों में अपेक्षाकृत कम हो सकती हैं।
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किस मिट्टी में पोषक तत्त्वों की कमी दूर करने के लिए जैव पदार्थ जोड़ना उपयोगी हो सकता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
लाल और पीली मिट्टी में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी हो सकती है। कम्पोस्ट, हरी खाद और फसल अवशेषों का उचित उपयोग मिट्टी की संरचना और पोषक स्थिति सुधारने में मदद कर सकता है।
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लैटेराइट मिट्टी के निर्माण में ‘निक्षालन’ का क्या अर्थ है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
निक्षालन में वर्षा का पानी मिट्टी से कुछ घुलनशील पदार्थों को नीचे की ओर ले जाता है। गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में यह प्रक्रिया तीव्र हो सकती है, जिससे लैटेराइट मिट्टी में चूना और सिलिका कम तथा लौह-एल्युमीनियम यौगिक अपेक्षाकृत अधिक रह जाते हैं।
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लैटेराइट मिट्टी का कृषि उपयोग किस बात पर अधिक निर्भर करता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
लैटेराइट मिट्टी में निक्षालन के कारण प्राकृतिक पोषक तत्त्व कम हो सकते हैं। उचित उर्वरक, जैव पदार्थ और जल प्रबंधन के साथ कॉफी, काजू तथा रबड़ जैसी फसलें कई क्षेत्रों में उगाई जाती हैं।
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मरुस्थलीय मिट्टी में लवण जमा होने का एक प्रमुख कारण क्या है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
शुष्क क्षेत्रों में वर्षा कम होने से लवण पर्याप्त रूप से धुलकर बाहर नहीं निकल पाते। तीव्र वाष्पीकरण भी सतह के पास लवणों के जमाव को बढ़ा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और फसल चयन प्रभावित होता है।
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मरुस्थलीय मिट्टी की कृषि क्षमता बढ़ाने के लिए कौन-सा उपाय सबसे उपयोगी हो सकता है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
मरुस्थलीय क्षेत्रों में नियंत्रित सिंचाई, जल संरक्षण और उचित निकास महत्त्वपूर्ण हैं। अत्यधिक सिंचाई और खराब निकास से लवणता बढ़ सकती है, इसलिए जल प्रबंधन के साथ फसल चयन भी आवश्यक है।
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पर्वतीय मिट्टी में ढाल के कारण मृदा निर्माण अधूरा क्यों रह सकता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
पर्वतीय ढलानों पर अपक्षयित सामग्री स्थिर नहीं रहती। गुरुत्वाकर्षण, बहता पानी और हिम इसे नीचे ले जा सकते हैं, जिससे मिट्टी की परतों को पूरी तरह विकसित होने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
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पर्वतीय वन मिट्टी में बड़े कण और चट्टानी टुकड़े अधिक होने का क्या परिणाम हो सकता है?
Options:
Correct Option: A
Explanation:
कई पर्वतीय मिट्टियाँ खुरदरी होती हैं और उनमें कंकड़ व चट्टानी टुकड़े अधिक होते हैं। बड़े कणों और ढाल के कारण पानी जल्दी निकल सकता है, हालांकि वास्तविक जल धारण क्षमता स्थानीय जलवायु और मिट्टी की गहराई पर निर्भर करती है।
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नहर-सिंचित खेत में लवणता बढ़ने से रोकने के लिए कौन-सा प्रबंधन उपयुक्त है?
Options:
Correct Option: B
Explanation:
खराब निकास और ऊँचा भूजल स्तर लवणता बढ़ा सकते हैं। उचित जल निकास, सिंचाई की निगरानी और जरूरत के अनुसार लवणों को नीचे धोने की व्यवस्था मिट्टी की स्थिति सुधारने में मदद कर सकती है।
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पीटमय मिट्टी का निर्माण किन परिस्थितियों में अधिक संभावित है?
Options:
Correct Option: C
Explanation:
पीटमय मिट्टी लगातार नमी या जलभराव वाले क्षेत्रों में बनती है, जहाँ जैव पदार्थों का विघटन धीमा हो सकता है और वे जमा होते रहते हैं। भारत में सुंदरबन और कुछ तटीय व तराई क्षेत्रों में ऐसी मिट्टियाँ मिलती हैं।
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कौन-सा विकल्प मृदा वर्गीकरण के आधारों को सबसे सही ढंग से दर्शाता है?
Options:
Correct Option: D
Explanation:
भारत की मिट्टियों का क्षेत्रीय वर्गीकरण उनकी उत्पत्ति, रंग, संघटन, भौतिक-रासायनिक विशेषताओं और वितरण के आधार पर समझा जाता है। जलवायु, मूल चट्टान, स्थलरूप और वनस्पति भी मृदा निर्माण को प्रभावित करते हैं।