चाय भारत की प्रमुख बागाती एवं वाणिज्यिक फसलों में से एक है। इसका वैज्ञानिक नाम Camellia sinensis है। भारत में चाय की खेती मुख्यतः उन क्षेत्रों में की जाती है; जहाँ गर्म एवं आर्द्र जलवायु, पर्याप्त वर्षा, अम्लीय एवं ह्यूमसयुक्त मिट्टी तथा अच्छी जल-निकास वाली भूमि उपलब्ध होती है। चाय उद्योग कृषि के साथ-साथ प्रसंस्करण, परिवहन, व्यापार और निर्यात के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
चाय के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ
चाय मुख्यतः उष्ण एवं उपोष्ण आर्द्र जलवायु की फसल है। इसके लिए सामान्यतः 20°–30°C के आसपास तापमान उपयुक्त माना जाता है। अधिक ठंड, पाला तथा लंबे समय तक रहने वाला अत्यधिक तापमान चाय के पौधों की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।
चाय के लिए लगभग 150–250 सेमी या उससे अधिक वार्षिक वर्षा उपयुक्त होती है। वर्षा का वर्षभर अच्छी तरह वितरित होना अधिक लाभदायक है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी जल-निकास व्यवस्था आवश्यक है, क्योंकि खेत में पानी का जमाव चाय की जड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है।
चाय की खेती के लिए गहरी, उपजाऊ, ह्यूमसयुक्त तथा अम्लीय मिट्टी उपयुक्त होती है। पर्वतीय ढालें चाय के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं क्योंकि यहाँ प्राकृतिक जल-निकास अच्छा होता है। चाय की पत्तियों की बार-बार तुड़ाई की जाती है, इसलिए इसमें प्रचुर एवं कुशल श्रम की आवश्यकता होती है।

भारत में चाय का वितरण
भारत में चाय की खेती मुख्यतः उत्तर-पूर्वी भारत और दक्षिण भारत में केंद्रित है। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, त्रिपुरा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश तथा कुछ अन्य राज्यों में भी चाय उगाई जाती है।
भारत के चाय उत्पादन में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल का सबसे अधिक योगदान है। 2024-25 में इन चार राज्यों का संयुक्त योगदान लगभग 96.92% था।
भारत के चाय क्षेत्रों को मोटे तौर पर असम घाटी, दार्जिलिंग, डुआर्स-तराई और दक्षिण भारत के नीलगिरि एवं पश्चिमी घाट क्षेत्रों में समझा जा सकता है।
चाय का राज्यवार उत्पादन एवं वितरण

असम
असम भारत का सबसे प्रमुख चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ चाय की खेती मुख्यतः ब्रह्मपुत्र घाटी के विस्तृत मैदानों में होती है। असम में चाय के लिए गर्म-आर्द्र जलवायु, पर्याप्त वर्षा और उपजाऊ जलोढ़ एवं दोमट मिट्टी उपलब्ध है।
असम के प्रमुख चाय उत्पादक जिले डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, सोनितपुर, लखीमपुर और उदलगुड़ी हैं। असम में चाय सामान्यतः 45–60 मीटर की ऊँचाई पर उगाई जाती है तथा यहाँ 250–380 सेमी वार्षिक वर्षा होती है। असम चाय अपने तेज, मजबूत स्वाद और गहरे रंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ CTC तथा Orthodox दोनों प्रकार की चाय का उत्पादन होता है।
2025 में असम का चाय उत्पादन 687.76 मिलियन किलोग्राम रहा, जो भारत के कुल उत्पादन का लगभग आधा है।
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल भारत का दूसरा प्रमुख चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ चाय उत्पादन के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं—दार्जिलिंग, डुआर्स और तराई। दार्जिलिंग क्षेत्र हिमालय की ढालों पर स्थित है। यहाँ की ऊँचाई, ठंडी एवं नम जलवायु तथा ढालदार भूमि चाय की विशिष्ट गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।
दार्जिलिंग चाय अपनी सुगंध, स्वाद और गुणवत्ता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। दार्जिलिंग की प्रमाणित चाय निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के पंजीकृत बागानों में ही उत्पादित की जाती है। दार्जिलिंग के अलावा कालिम्पोंग भी चाय उत्पादन से जुड़ा क्षेत्र है।
डुआर्स मुख्यतः जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार क्षेत्र में तथा कुछ भाग कूचबिहार में फैला है। डुआर्स-तराई क्षेत्र में चाय लगभग 90–1750 मीटर की ऊँचाई तक उगाई जाती है तथा यहाँ लगभग 350 सेमी वार्षिक वर्षा होती तराई क्षेत्र में दार्जिलिंग के मैदानी भाग तथा उत्तर बंगाल के क्षेत्र शामिल हैं। 2025 में पश्चिम बंगाल का चाय उत्पादन 411.18 मिलियन किलोग्राम रहा।
तमिलनाडु
दक्षिण भारत में तमिलनाडु प्रमुख चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ चाय की खेती मुख्यतः नीलगिरि जिले में केंद्रित है। नीलगिरि की पहाड़ी ढालें, ऊँचाई, वर्षा और वर्षभर अपेक्षाकृत अनुकूल तापमान चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं।
नीलगिरि जिले के ऊटी (उधगमंडलम), कुन्नूर, कोटागिरी और कुंडाह प्रमुख चाय क्षेत्र हैं। यहां चाय लगभग 1,000–2,500 मीटर की ऊँचाई पर उगाई जाती है और यहाँ 150–230 सेमी वार्षिक वर्षा होती है।
इस क्षेत्र की चाय को उसकी सुगंध और विशिष्ट स्वाद के लिए जाना जाता है। यहाँ दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व दोनों मानसूनों का प्रभाव होने के कारण कई क्षेत्रों में वर्षभर चाय की पत्तियों की तुड़ाई संभव होती है। 2025 में तमिलनाडु का चाय उत्पादन 171.44 मिलियन किलोग्राम रहा।
केरल
केरल में चाय की खेती मुख्यतः पश्चिमी घाट के ऊँचे भागों में होती है। यहाँ इडुक्की और वायनाड सबसे महत्वपूर्ण चाय उत्पादक जिले हैं। इसके अतिरिक्त कोल्लम, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, मलप्पुरम और पालक्काड में भी चाय की खेती की जाती है। इडुक्की और वायनाड मिलकर केरल के चाय उत्पादन का लगभग 85–90% हिस्सा देते हैं।
इडुक्की में मुन्नार, पीरमेड, वंडिपेरियार और एलाप्पारा प्रमुख चाय क्षेत्र हैं। इडुक्की के चाय क्षेत्र को वंडिपेरियार, पीरमेड, एलाप्पारा और हाई रेंज/मुन्नार जैसे क्षेत्रों में भी बाँटा जाता है। 2025 में केरल का चाय उत्पादन 58.21 मिलियन किलोग्राम रहा।
अन्य चाय उत्पादक राज्य
प्रमुख चार राज्यों के अलावा त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, मेघालय, नागालैंड और सिक्किम में भी चाय का उत्पादन होता है। इनमें से कुछ राज्य पारंपरिक चाय क्षेत्र हैं, जबकि पूर्वोत्तर के कई राज्यों में चाय की खेती का विस्तार अपेक्षाकृत बाद में हुआ।
विशेष रूप से बिहार का किशनगंज, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र तथा उत्तराखंड के कुछ पहाड़ी क्षेत्र चाय उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।
भारत में चाय का उत्पादन
भारत में चाय उत्पादन में दीर्घकालीन वृद्धि हुई है। ऐतिहासिक आँकड़ों के अनुसार 1950-51 में भारत में लगभग 278 हजार टन चाय का उत्पादन हुआ था, जो 2025 में लगभग 1,369.98 हजार टन तक पहुँच गया।
| उत्पादन रैंक | राज्य | 2025 उत्पादन (मिलियन किग्रा) | भारत के उत्पादन में हिस्सा (%) | चाय क्षेत्र (हेक्टेयर) | उपज (किग्रा/हेक्टेयर) |
| 1 | असम | 687.76 | 50.20% | 3,59,069 | 1,915 |
| 2 | पश्चिम बंगाल | 411.18 | 30.01% | 1,39,762 | 2,942 |
| 3 | तमिलनाडु | 171.44 | 12.51% | 65,955 | 2,600 |
| 4 | केरल | 58.21 | 4.25% | 35,697 | 1,630 |
| 5 | कर्नाटक | 4.15 | 0.30% | 2,093 | 1,982 |
| अन्य राज्य | 37.24 | 2.72% | — | — | |
| भारत | 1,369.98 | 100% | 6,02,576 | 2,274 |
चाय के प्रकार
भारत में चाय को प्रसंस्करण के आधार पर मुख्यतः CTC, Orthodox और Green Tea के रूप में समझा जाता है। CTC का अर्थ Crush, Tear and Curl है। भारत में घरेलू बाजार में CTC चाय का व्यापक उपयोग होता है, जबकि Orthodox तथा विशेष प्रकार की चाय का निर्यात बाजार में विशेष महत्व है।
Tea Board की 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उत्पादन में CTC की हिस्सेदारी 89.61%, जबकि Orthodox और Green Tea की संयुक्त हिस्सेदारी 10.39% थी।
चाय का आंतरिक उपभोग
भारत विश्व के बड़े चाय उत्पादक देशों के साथ-साथ प्रमुख चाय उपभोक्ता देश भी है। देश में उत्पादित चाय का बड़ा भाग घरेलू बाजार में ही खपत हो जाता है। भारत विश्व चाय खपत में लगभग 18% हिस्सा रखता है तथा भारतीय चाय उत्पादन का लगभग 84% घरेलू बाजार में ही खपत हो जाता है।
चाय का निर्यात
भारत की चाय का निर्यात मुख्यतः अंतरराष्ट्रीय बाजार में किया जाता है और इससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। 2024-25 में भारत ने 257.88 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया, जिसका मूल्य लगभग ₹7,503.52 करोड़ था।
निर्यात में अब पारंपरिक थोक चाय के साथ पैकेट टी, टी-बैग, इंस्टेंट टी तथा अन्य मूल्यवर्धित चाय का महत्व बढ़ रहा है। इससे भारतीय चाय उद्योग को अधिक मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
चाय उद्योग का आर्थिक महत्व
चाय उद्योग विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है। चाय बागानों में उत्पादन के अलावा पत्तियों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, विपणन और निर्यात से भी रोजगार मिलता है।
2024-25 में भारत में लगभग 2.49 लाख छोटे चाय उत्पादक थे और उनका उत्पादन में योगदान 54.55% तक पहुँच गया था। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय चाय उद्योग में बड़े चाय बागानों के साथ-साथ छोटे उत्पादकों की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण हो गई है।
चाय उत्पादन की प्रमुख समस्याएँ
भारतीय चाय उद्योग को जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, अत्यधिक तापमान, कीट एवं रोग, बढ़ती उत्पादन लागत और श्रम संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पुराने चाय बागानों में पौधों की उत्पादकता कम होना तथा बागानों के पुनरोपण की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण समस्या है।
इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और गुणवत्ता की बढ़ती मांग भारतीय चाय उद्योग के लिए चुनौती हैं। इसलिए भविष्य में उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, मूल्यवर्धित चाय के उत्पादन और ब्रांडिंग पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है।
FAQs
Q.1 भारत में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। 2025 में असम का उत्पादन 687.76 मिलियन किलोग्राम रहा।
Q.2 भारत में दार्जिलिंग चाय कहाँ उत्पादित होती है?
दार्जिलिंग चाय पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में हिमालय की ढालों पर स्थित निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित होती है। यह अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
Q.3 भारत में चाय की खेती के लिए कौन-सी भौगोलिक दशाएँ उपयुक्त हैं?
गर्म एवं आर्द्र जलवायु, पर्याप्त वर्षा, अम्लीय एवं ह्यूमसयुक्त मिट्टी, अच्छी जल-निकास वाली भूमि और पर्याप्त श्रम चाय की खेती के लिए प्रमुख आवश्यकताएँ हैं।