
पिछले कुछ दिनों से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में लगातार भारी से अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की जा रही है। कई शहरों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि नदियाँ उफान पर हैं। आखिर अचानक मानसून इतना सक्रिय क्यों हो गया? इसका जवाब भारत के ऊपर बने Low Pressure Area (निम्न दाब क्षेत्र) और Monsoon Trough (मानसूनी द्रोणी) में छिपा है।
जब किसी क्षेत्र में हवा का दबाव आसपास की तुलना में कम हो जाता है, तो उसे Low Pressure Area कहा जाता है। इस क्षेत्र की ओर चारों दिशाओं से नम हवाएँ तेजी से खिंचती हैं। यदि ये हवाएँ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी लेकर आती हैं, तो बादलों का तेजी से विकास होता है और भारी वर्षा शुरू हो जाती है। वर्तमान समय में भारत के मध्य भाग में सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र लगातार नमी को आकर्षित कर रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश की तीव्रता बढ़ गई है।
इसके साथ ही Monsoon Trough, जो उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली एक निम्न दाब वाली लंबी पट्टी होती है, इन दिनों सामान्य स्थिति से अधिक सक्रिय है। जब यह द्रोणी हिमालय की तलहटी के करीब या मध्य भारत के ऊपर बनी रहती है, तो वर्षा वाले बादल लगातार उसी क्षेत्र में बनते रहते हैं। परिणामस्वरूप कई जिलों में एक ही दिन में सामान्य से कई गुना अधिक वर्षा दर्ज हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) भी ऐसी चरम वर्षा घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा रहा है। वातावरण के गर्म होने से हवा अधिक जलवाष्प धारण करती है, जिससे बादल बनने पर कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि आजकल कई स्थानों पर कुछ ही घंटों में महीनों जितनी बारिश रिकॉर्ड की जा रही है।
क्या आप जानते हैं?
- Low Pressure Area जितना मजबूत होगा, वर्षा की संभावना उतनी अधिक होगी।
- बंगाल की खाड़ी भारत के मानसून के लिए नमी का सबसे बड़ा स्रोत मानी जाती है।
- Monsoon Trough की स्थिति बदलने से वर्षा का क्षेत्र भी बदल जाता है।
- लगातार सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ा सकते हैं।
- जलवायु परिवर्तन के कारण Extreme Rainfall Events पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहे हैं।
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