
Strait of Hormuz विश्व का सबसे महत्वपूर्ण Energy Chokepoint माना जाता है। यह एक संकरा समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और आगे अरब सागर से जोड़ता है। भौगोलिक दृष्टि से यह एक Strait है, अर्थात ऐसा जलमार्ग जो दो बड़े जल निकायों को जोड़ता है और दो भूभागों को अलग करता है।
सामरिक (Strategic), आर्थिक (Economic) और भू-राजनीतिक (Geopolitical) दृष्टि से इसका महत्व अत्यंत अधिक है, क्योंकि पश्चिम एशिया के तेल उत्पादक देशों का अधिकांश कच्चा तेल इसी मार्ग से वैश्विक बाजारों तक पहुँचता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इतिहास प्राचीन काल से ही व्यापार और सामरिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। “Hormuz” शब्द की उत्पत्ति को लेकर कई मत हैं। कुछ विद्वान इसे फारसी शब्द Hur-mogh (खजूर का पेड़) से जोड़ते हैं, जबकि अन्य इसे ज़ोरास्ट्रियन धर्म के देवता Ahura Mazda से संबंधित मानते हैं। यूनानी शब्द hormos (अर्थात खाड़ी) को भी एक संभावित स्रोत माना गया है।
पहली शताब्दी के समुद्री मार्गदर्शक ग्रंथ Periplus of the Erythraean Sea में इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह मार्ग प्राचीन समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा था। मध्यकाल में भारत, फारस और मध्य एशिया के बीच मसालों, रेशम और सूखे मेवों का व्यापार इसी रास्ते से होता था।
10वीं से 17वीं शताब्दी तक यहाँ एक शक्तिशाली स्थानीय साम्राज्य का प्रभाव रहा। आधुनिक काल में ईरान-इराक युद्ध (1980s) के दौरान “Tanker War” और 1988 में अमेरिका द्वारा चलाया गया Operation Praying Mantis इस क्षेत्र की सामरिक संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।
भौगोलिक स्थिति (Geographical Location and Features)
भौगोलिक रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य अत्यंत संकरा है, जो इसे सामरिक दृष्टि से और भी संवेदनशील बनाता है। इसके उत्तर में Iran स्थित है, जबकि दक्षिण में Oman का मुसैंडम प्रायद्वीप और United Arab Emirates की सीमाएँ लगती हैं। इसकी लंबाई लगभग 167 किलोमीटर है और न्यूनतम चौड़ाई लगभग 21 समुद्री मील (39 किमी) है।
इतनी कम चौड़ाई के कारण यदि यहाँ कोई सैन्य या राजनीतिक तनाव उत्पन्न हो, तो वैश्विक समुद्री यातायात तुरंत प्रभावित हो सकता है। जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए यहाँ Traffic Separation Scheme (TSS) लागू है, जिसमें आने और जाने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित की गई हैं।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा में महत्व (Global Trade & Energy Security)
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को “Global Energy Lifeline” कहा जाता है क्योंकि यह विश्व का सबसे बड़ा तेल पारगमन बिंदु है। वर्ष 2024 के आँकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल (b/d) कच्चा तेल और पेट्रोलियम पदार्थ यहाँ से गुजरते हैं, जो वैश्विक खपत का लगभग 20% है।
विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25% और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार का लगभग 20% इसी मार्ग से होता है। विशेष रूप से Qatar द्वारा निर्यातित LNG का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से एशियाई देशों तक पहुँचता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई राष्ट्र यहाँ से गुजरने वाले तेल के प्रमुख आयातक हैं।
यदि इस मार्ग में व्यवधान उत्पन्न होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि (Price Shock) देखी जाती है, जिससे महँगाई (Inflation) और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) प्रभावित हो सकता है।
वैकल्पिक मार्ग और उनकी सीमाएँ (Alternative Routes and Limitations)
यद्यपि कुछ पाइपलाइनें हॉर्मुज को बायपास करने के लिए विकसित की गई हैं, फिर भी वे पूर्ण समाधान प्रदान नहीं करतीं। सऊदी अरब की East-West Pipeline तेल को लाल सागर तक पहुँचाती है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात की Habshan-Fujairah Pipeline सीधे ओमान की खाड़ी तक तेल पहुँचाती है।
ईरान ने भी Goreh-Jask Pipeline विकसित की है। किंतु इन सभी पाइपलाइनों की संयुक्त अतिरिक्त क्षमता लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन ही है, जो हॉर्मुज से गुजरने वाले 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन की तुलना में अत्यंत कम है। इसलिए हॉर्मुज का कोई पूर्ण विकल्प उपलब्ध नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी स्थिति (International Legal Status)
हॉर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अंतर्गत आता है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के अनुसार यह “Transit Passage” क्षेत्र है, जहाँ सभी देशों के जहाजों को शांतिपूर्ण पारगमन का अधिकार प्राप्त है। तथापि, क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक तनाव के कारण कई बार यहाँ नौसैनिक गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
भारत के लिए महत्व (Relevance for India)
भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयातित तेल और गैस पर निर्भर है। इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि यहाँ कोई संकट उत्पन्न होता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि, महँगाई में इजाफा और आर्थिक अस्थिरता देखी जा सकती है।
ऐसी स्थिति में भारत अपने Strategic Petroleum Reserves (SPR) का उपयोग कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण (Energy Diversification) आवश्यक है।
इस प्रकार हॉर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बिंदु है। इसकी संकरी भौगोलिक संरचना, विशाल तेल पारगमन और लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव इसे विश्व का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग बनाते हैं।
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