आर्थिक भूगोल की परिभाषा एवं प्रकृति (Definition and Nature of Economic Geography)

भूगोल की प्रमुख शाखा, मानव भूगोल में मानव द्वारा प्राकृतिक वातावरण से किए गये संघर्ष एवं समायोजन के फलस्वरूप बने दृश्यों का अध्ययन किया जाता है। मानव की आवश्यकताओं तथा उनकी आपूर्ति के साधनों एवं विधियों का अध्ययन मानव भूगोल का केन्द्र बिंदु होता है। इसके अतिरिक्त मानव या समाजों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन पृथ्वी के समस्त धरातल पर क्षेत्रीय तत्वों के परिपेक्ष्य में किया जाता है। इसीलिए इसे भौगोलिक अध्ययन का ही भाग माना गया है, जिसे हम आर्थिक भूगोल (Economic Geography) भी कहते हैं।
मानव भूगोल की प्रकृति (Nature of Human Geography)

हम जानते हैं कि घर, गाँव, नगर, सड़कों व रेलों का उद्योग, खेत, पत्तन, दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुएँ आदि भौतिक पर्यावरण द्वारा दिए गए संसाधनों का उपयोग करते हुए मानव द्वारा निर्मित किए गए हैं। इन मानवीय तत्वों तथा भौतिक पर्यावरण के बीच, समय व स्थान के साथ बदलते हुए संबंधों का अध्ययन मानव भूगोल है।