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भारत में बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves in India)

Biosphere Reserves in India

यूनेस्को के दिशानिर्देश और मानदंड के आधार पर इंडियन नेशनल मैन एंड बायोस्फीयर (MAB) समिति ने  25 अक्टूबर 2007 तक 14 बायोस्फीयर रिजर्व की पहचान की, जिनकी संख्या वर्तमान में बढकर 18 हो चुकी है।

विश्व के प्रमुख वनस्पति प्रदेश (Major Floral Regions of the World)

Major Floral Regions of the World

किसी खास प्रकार के आवासों (समान पर्यावरण वाले) में वानस्पतिक समूहों के बृहद्स्तरीय रूपों को वानस्पतिक जगत (floristic kingdoms) कहते हैं। प्रत्येक वानस्पतिक जगत में भी प्रादेशिक स्तर पर कुछ विभिन्नताएं अवश्य होती हैं, अत: प्रत्येक वानस्पतिक जगत को छोटे-2 क्षेत्रीय वानस्पतिक प्रान्तों (floristic provinces) या वानस्पतिक प्रदेशों में विभक्त किया जाता है।

जीवमण्डल आगार का कार्यात्मक प्रतिरूप (Functional Pattern of Biosphere Reserve)

Functions-of-Biosphere-Reserve

‘मनुष्य एवं जीवमण्डल प्रोग्राम’ (MAP) के एक्शन प्लान तथा साइंटफिक पैनेल ने जीवमण्डल आगार के विभिन्न मण्डलों में किए जाने वाले कार्यों का निर्धारण किया है। माइकेल बैटिसी (1986) ने इन कार्यों को संक्षिप्त रूप में निम्न प्रकार से प्रस्तुत किया है

जीवमण्डल आगार का मण्डलन (Zoning of Biosphere Reserve) 

Zoning-of-Biosphere-Reserve

सन् 1976 में UNESCO की टास्क फोर्स ने जीवमण्डल आगार के सरल मण्डलन प्रतिरूप (zoning pattern) का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव में जीवमण्डल आगार के 3 मण्डलों को सम्मिलित किया गया। 

जीवमण्डल आगार (Biosphere Reserve)

Role-of-biosphere-reserve-in-ecosystem

जीवमण्डल आगार (भण्डार) के अन्तर्गत स्थलीय एवं सागरीय (मुख्य रूप से सागर तटीय) पारिस्थितिक तंत्रों को शामिल किया जाता है जहाँ पर अजैविक एवं जैविक संसाधनों (पौधों एवं जन्तुओं) का समुचित तरह से प्रबन्धन एवं संरक्षण किया जाता है। 

भारत में जैव विविधता हॉटस्पाट (Biodiversity Hotspots in India)

Biodiversity Hotspots in India

‘जैव विविधता हाटस्पाट’ (biodiversity hotspots) शब्द का सर्वप्रथम उपयोग ब्रिटिश पारिस्थितिकीविद नार्मन मायर ने सन् 1998 में किया था। नार्मन मायर के अनुसार उन क्षेत्रों को जैव विविधता हाटस्पाट कहते हैं जहां पौधों, जन्तुओं एवं सूक्ष्मजीवों के समृद्ध जीवीय समुदायों की भरमार हो तथा जिनमें स्थानिक प्रजातियों ( पौधों, जन्तुओं एवं सूक्ष्म जीवों की उन प्रजातियों को स्थानिक प्रजाति कहते हैं जो किसी क्षेत्र विशेष में ही पायी जाती हैं, अन्य क्षेत्रों में नहीं पायी जाती) का बाहुल्य होता है। 

जैव विविधता के प्रकार (Types of Biodiversity)

Types of Biodiversity

जननिक विविधता को पौधों एवं जन्तुओं की प्रजातियों के जीन (genes) के स्तरों पर विभिन्नता एवं अन्तर के रूप में देखा जाता है। वास्तव में, जीन की विभिन्नता प्रजातियों में विभिन्नता को तथा प्रजातियों की विभिन्नता की मात्रा जैव विविधता (जैव विविधता की समृद्धि, या निर्धनता) को निर्धारित करती है। 

जैवविविधता के तत्व (Elements of Biodiversity)

Elements of Biodiversity

प्रजाति विभिन्नता का सामान्य अर्थ होता है किसी निश्चित पारिस्थितिक तंत्र के पौधों, जन्तुओं एवं सूक्ष्म जीवों (micro-organisms) के समुदायों की प्रजातियों की विभिन्नता।

जैवविविधता : अवधारणा एवं परिभाषाएं (Biodiversity : Concept and Definitions)

Biodiversity

जैवविविधता का सामान्य अर्थ होता है किसी भी विस्तृत क्षेत्र की पर्यावरणीय दशाओं में पौधों एवं जन्तुओं के समुदायों के जीवों की प्रजातियों (species of organisms) की विविधता (variety)।

मृदा संरक्षण के उपाय(Methods of Soil Conservation)

soil-conservation

अलग-अलग पंक्तियों में भिन्न-भिन्न फसलों के उगाने को अन्तराल सस्य तथा एक ही साथ कई फसलों के सामूहिक रूप से उगाने को मिश्र सस्य कहते हैं

जीवीय अनुक्रम (Biotic Succession)

Phases-of-Biotic-Succession

किसी भी पारिस्थितिक तंत्र या आवास में वनस्पति के एक समुदाय के दूसरे समुदाय द्वारा किए जाने वाले प्रतिस्थापन (replacement) को अनुक्रम (succession) कहते हैं तथा इस तरह के परिवर्तन (वनस्पति समुदाय के) के क्रम (sequence) को क्रमक (sere) कहते हैं। 

जलवायु पर आधारित पौधों का वर्गीकरण (Classification of Plants Based on Climate)

xerophytes

जलवायु के तत्वों जैसे धूप, तापमान, वाष्पीकरण, आर्द्रता, वाष्पोत्सर्जन (evapotranspiration), वर्षण (precipitation) आदि तथा मिट्टियों में नमी के आधार पर पौधों का निम्न 4 प्रमुख प्रकारों में वर्गीकरण किया जाता है

रौनकियर के अनुसार पौधों का वर्गीकरण (Raunkiaer’s Classification of Plants)

फैनेरोफाइट्स

रौनकियर (Raunkiaer, 1934) ने पौधों का वर्गीकरण उनके जीवन-रूप (life-form) के आधार पर किया है। रौनकियर ने पौधों के वर्गीकरण का मुख्य आधार पौधों के जीवन रूप एवं जलवायु के कारकों के मध्य सम्बन्ध  बनाया।

पौधों का पदानुक्रमिक या सौपानिक वर्गीकरण (Hierarchical Classification of Plants) 

Hierarchical-Classification-of-Plants

पादप जगत में पौधों के पदानुक्रम में सबसे निचली इकाई प्रजाति (species) होती है। समान व्यवहार करने वाले एकाकी पौधों (जिसमें पौधे आपस में ही प्रजनन करते हैं तथा अपने जैसे ही वंश या संतति (offsprings) उत्पन्न करते हैं), की संख्या को जनसंख्या (population) कहते हैं और इनके समूह या वर्ग को प्रजाति कहते हैं।